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अवैज्ञानिक दोहन से गिरी जंगली लहसुन की पैदावार : स्वर्णलता

Wed, 19 Mar 2025 07:20 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Wed, 19 Mar 2025 07:20 AM IST
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Wild garlic production fell due to unscientific exploitation: Swarnalata
मनाली में जंगली लहसुन पर हुए कार्यक्रम में भाग लेते किसान-बागवान। -स्रोत : आयोजक
कुल्लू। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला ने ग्राम पंचायत जगतसुख में जंगली लहसुन (काकोली) के कृषिकरण तकनीक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के तहत आयोजित शिविर में जगतसुख और गोजरा के 40 किसानों व बागवानों ने भाग लिया।
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प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. स्वर्णलता ने बताया कि फ्रिटिलेरिया रॉयली (काकोली या जंगली लहसुन) एक दुर्लभ औषधीय पौधा है, जिसकी बाजार में 10,000 से 15,000 रुपये प्रति किलो तक कीमत है। बढ़ती मांग और अवैज्ञानिक दोहन के कारण इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे यह संरक्षण के संकट में आ गया है। ऐसे में इसकी खेती और वैज्ञानिक संरक्षण अनिवार्य हो गया है।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल के शीतोष्ण क्षेत्रों में औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती से किसानों की आय बढ़ सकती है और प्राकृतिक संसाधनों का भी संरक्षण किया जा सकता है। मुख्यातिथि डॉ. जगदीश सिंह पितांबर सिंह नेगी ने भी किसानों को औषधीय खेती की संभावनाओं और संरक्षण के महत्व पर जागरूक किया।
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