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बेहतर काटछांट से होगी सेब की उम्दा फसल
ब्यूरो/अमर उजाला/खराहल
Updated Sun, 08 Jan 2017 09:43 PM IST
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apple orchard
दिसंबर महीने से सेब की काटछांट का काम बागवानों ने जोरों से आरंभ कर दिया है। इन दिनों बागवान प्रूनिंग के काम में काफी व्यस्त हो गए हैं। बेहतर उत्पादन के लिए सेब सहित नाशपाती और प्लम की काटछांट का कार्य उम्दा किस्म का होना आवश्यक है। ऐसे में फलों की गुणवत्ता और आकार अव्वल किस्म का होता है। लिहाजा, बागवानों को प्रूनिंग का काम प्रशिक्षित व्यक्तियों से करवाना चाहिए। अकसर देखा गया है कि बागवान इस कार्य में ज्यादा एहतियात नहीं बरतते हैं।
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इसका खामियाजा बागवानों को उत्पादन के समय भुगतना पड़ता है। गलत प्रूनिंग से फसल की पैदावार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि काटछांट करते समय पौधे की रोग ग्रस्त टहनियों का काट लेना जरूरी है। किस्म के अनुरूप ही प्रूनिंग का कार्य लाजिमी होता है। गलत तरीके से प्रूनिंग का कार्य करने से आगामी फसल के साथ पौधों के विकास पर भी असर पड़ता है। प्रगतिशील बागवान एवं पूर्व विधायक चंद्रसेन ठाकुर बताते हैं कि प्रूनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे बागवान पौधे में वांछित विकास और गुणवत्ता युक्त फसल को प्राप्त कर सकते हैं।
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घाटी के बागवान अरुण ठाकुर, चमन ठाकुर, झाबे राम, सुरेश कुमार, अमन, सुशील ठाकुर, कैलाश, तीर्थ राम, देवराज, सुमन, युवराज, राजगीर तथा अभिताज का कहना है कि इन दिनों बगीचों में प्रूनिंग का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रूनिंग के कार्य के लिए माहिरों की राय भी ली जा रही है। काटछांट से बाद चौपाटिया पेंट भी पौधे के जख्मों पर लगाया जा रहा है।
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प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवाएं प्रूनिंग सामान्य किस्म और स्पर किस्म की प्रूनिंग अलग-अलग है। स्पर वैरायटी में दो इंच में बीमे हटाएं तो फल का आकार छोटा होगा। अगर चार इंच से बीमे हटाएं तो फल मध्यम रहेगा। छह इंच तक बीमे हटाएं तो फल लारज और उम्दा भी होगा। बागवानों को प्रशिक्षित व्यक्ति से ही प्रूनिंग का कार्य करवाना चाहिए।
डॉ. आरएल शर्मा, उपनिदेशक बागवानी विभाग कुल्लू