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Kullu News: मौसम बदला, सेहत बिगड़ी... अस्पतालों में उमड़ रही भीड़

Thu, 11 Jun 2026 11:12 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:12 PM IST
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Weather changes, health suffers... crowds thronging hospitals.
कुल्लू। जिले के अस्पतालों में डायरिया के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी प्रमुख वजह मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और दूषित पेयजल को मान रहे हैं। जिले की विभिन्न घाटियों में इन दिनों असमय बारिश हो रही है, जिससे जून में भी सुबह और शाम ठंड बनी हुई है। वहीं, दूषित पानी के सेवन से पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की मेडिसिन, शिशु रोग, सामान्य ओपीडी और ट्रॉमा विभाग में प्रतिदिन 15 से 25 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें डायरिया के लक्षण पाए जा रहे हैं।
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वीरवार सुबह करीब 8:30 बजे से ही क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में मरीजों का आना शुरू हो गया। सुबह 9 बजे तक महिला, पुरुष और ऑनलाइन पंजीकरण काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। करीब 9:30 बजे तक मेडिसिन, शिशु रोग और सामान्य ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ओपीडी में उपचार सुबह 9:30 बजे से शुरू हुआ।
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पूर्वाह्न 11:30 बजे मेडिसिन वार्ड में चिकित्सक भर्ती मरीजों का उपचार करते नजर आए। वार्ड के सभी 70 बिस्तर भरे हुए थे, जबकि अतिरिक्त मरीजों का उपचार गैलरी में लगाए गए बिस्तरों पर किया जा रहा था। अस्पताल में शाम 4 बजे तक मरीजों की आवाजाही बनी रही। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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डायरिया के कारण और लक्षण
डायरिया दूषित पानी पीने, वायरल संक्रमण, बैक्टीरिया संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, आसपास साफ-सफाई की कमी, कटे हुए फलों के सेवन तथा पेयजल भंडारण पात्रों की नियमित सफाई न होने के कारण हो सकता है। दिन में तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त आना इसका प्रमुख लक्षण है। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पेट दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी, बार-बार दस्त आना, बुखार, कमजोरी महसूस होना तथा आंखों का धंस जाना शामिल हैं।

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ऐसे करें बचाव
डायरिया का उपचार सरल और कम खर्चीला है। लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। यदि ओआरएस उपलब्ध न हो तो नमक, चीनी और नींबू मिलाकर तैयार घोल का सेवन कराया जा सकता है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है। इसके साथ ही चिकित्सकीय सलाह लेकर उचित उपचार करवाना आवश्यक है।
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