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Kullu News: रेहड़ी पर चाय बेचकर आत्मनिर्भर बनीं ऊषा
Wed, 21 May 2025 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 21 May 2025 11:06 PM IST
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कुल्लू में चाय की दुकान चलाती उषा देवी।-संवाद
200 रुपये से अब रोज कमा रहीं 8,000 रुपये, दो लोगों को दिया रोजगार
मंडी जिले की ऊषा ने 25 साल पहले 2001 में शुरू किया था चाय का कारोबार
रोशन ठाकुर
कुल्लू। चुनौती से लड़कर आगे बढ़ने का जज्बा कामयाबी की इबारत लिख ही देता है। फिर चाहे मार्ग में कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं, पहाड़ से ऊंचे हौसले के आगे सब बौनी ही साबित होती हैं। कुछ इसी तरह की सफलता की कहानी कुल्लू के ढालपुर के फूड कोर्ट में चाय की दुकान करने वाली ऊषा देवी की है। वह 25 साल से चाय की दुकान कर रही हैं। विश्व चाय दिवस पर उन्होंने खुलकर अपनी जिंदगी के संघर्ष की कहानी बयां की।
उन्होंने बताया कि वह 2001 में मंडी जिले के बालीचौकी के मातला गांव से परिवार के साथ रोजगार की तलाश में कुल्लू आई थीं। जिला अस्पताल कुल्लू के बाहर सड़क के किनारे एक गली में रेहड़ी लगाकर चाय बेचने का काम शुरू किया। तंग गली में उन्होंने 2014 तक एक रेहड़ी में चाय के साथ परांठे बना कर अपने रोजगार को आगे बढ़ाया। 2014 में ढालपुर के कलाकेंद्र के पीछे जिला प्रशासन ने बेंडर पॉलिसी के तहत एक मार्केट का निर्माण किया। उन्हें भी यहां एक दुकान मिली। अपने काम का विस्तार किया। इसमें चाय के साथ परांठे और दाल-चावल को भी शामिल किया।
45 वर्षीय ऊषा देवी ने बताया कि वह दो लोगों को रोजगार रही हैं। जब वह 2001 में कुल्लू आई थीं तो डेढ़ रुपये चाय का गिलास बेचकर रोज की आय 150 से 200 रुपये होती थी। इससे परिवार का पालन-पोषण कर चुनौती भरा था। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम को आगे बढ़ाया और अब वह रोज 8,000 रुपये कमा रही हैं।
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कहा कि इस दौरान उनके पति का भी पूरा सहयोग मिला। वह सुबह आठ बजे दुकान आती हैं। शाम 6:00 बजे बंद करती हैं। उनके हाथ की बनी चाय और आलू के परांठे को खाने के लिए यहां लाइन लगी रहती है। खासकर सुबह ब्रेकफास्ट और दोपहर के वक्त यहां नौकरी पेशा, स्कूल-काॅलेज के विद्यार्थियों की भारी भीड़ रहती है। वह दस रुपये में चाय का कप बेचती हैं। दोपहर के खाना खाने आए दीपक, सुनीता, प्रेम लाल, प्रताप सिंह व सुभाष ठाकुर ने कहा कि वह रोज यहां आते हैं। शाटीनाग टी स्टॉल में चाय के साथ परांठे का आनंद लेते हैं। उनके बनाए एक परांठे से पेट भर जाता है।
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मंडी जिले की ऊषा ने 25 साल पहले 2001 में शुरू किया था चाय का कारोबार
रोशन ठाकुर
कुल्लू। चुनौती से लड़कर आगे बढ़ने का जज्बा कामयाबी की इबारत लिख ही देता है। फिर चाहे मार्ग में कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं, पहाड़ से ऊंचे हौसले के आगे सब बौनी ही साबित होती हैं। कुछ इसी तरह की सफलता की कहानी कुल्लू के ढालपुर के फूड कोर्ट में चाय की दुकान करने वाली ऊषा देवी की है। वह 25 साल से चाय की दुकान कर रही हैं। विश्व चाय दिवस पर उन्होंने खुलकर अपनी जिंदगी के संघर्ष की कहानी बयां की।
उन्होंने बताया कि वह 2001 में मंडी जिले के बालीचौकी के मातला गांव से परिवार के साथ रोजगार की तलाश में कुल्लू आई थीं। जिला अस्पताल कुल्लू के बाहर सड़क के किनारे एक गली में रेहड़ी लगाकर चाय बेचने का काम शुरू किया। तंग गली में उन्होंने 2014 तक एक रेहड़ी में चाय के साथ परांठे बना कर अपने रोजगार को आगे बढ़ाया। 2014 में ढालपुर के कलाकेंद्र के पीछे जिला प्रशासन ने बेंडर पॉलिसी के तहत एक मार्केट का निर्माण किया। उन्हें भी यहां एक दुकान मिली। अपने काम का विस्तार किया। इसमें चाय के साथ परांठे और दाल-चावल को भी शामिल किया।
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45 वर्षीय ऊषा देवी ने बताया कि वह दो लोगों को रोजगार रही हैं। जब वह 2001 में कुल्लू आई थीं तो डेढ़ रुपये चाय का गिलास बेचकर रोज की आय 150 से 200 रुपये होती थी। इससे परिवार का पालन-पोषण कर चुनौती भरा था। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम को आगे बढ़ाया और अब वह रोज 8,000 रुपये कमा रही हैं।
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कहा कि इस दौरान उनके पति का भी पूरा सहयोग मिला। वह सुबह आठ बजे दुकान आती हैं। शाम 6:00 बजे बंद करती हैं। उनके हाथ की बनी चाय और आलू के परांठे को खाने के लिए यहां लाइन लगी रहती है। खासकर सुबह ब्रेकफास्ट और दोपहर के वक्त यहां नौकरी पेशा, स्कूल-काॅलेज के विद्यार्थियों की भारी भीड़ रहती है। वह दस रुपये में चाय का कप बेचती हैं। दोपहर के खाना खाने आए दीपक, सुनीता, प्रेम लाल, प्रताप सिंह व सुभाष ठाकुर ने कहा कि वह रोज यहां आते हैं। शाटीनाग टी स्टॉल में चाय के साथ परांठे का आनंद लेते हैं। उनके बनाए एक परांठे से पेट भर जाता है।