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जिले के पांच बड़े अस्पतालों में नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
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फरेंद्र ठाकुर
कुल्लू। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदतर हालत है। इससे चार जिलों के मरीजों को परेशानी हो रही है। मरीज महंगे दाम पर निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं। आलम यह है कि कुल्लू के पांच बड़े अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है।
अस्पतालों में मरीजों के लंबे समय से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, सिविल अस्पताल तेगुबेहड़, बंजार, मनाली व सीएचसी जरी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, सिविल अस्पताल तेगुबेहड़ और मनाली, सीएचसी जरी में मशीनें होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अस्पतालों में लाखों रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हैं। हैरानी की बात है कि सिविल अस्पताल बंजार में अल्ट्रासाउंड मशीनें ही नहीं हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं।
कुल्लू अस्पताल में मंगलवार को पहुंचे मरीज ज्ञान सिंह, सुरेश ठाकुर, केहर सिंह व श्यामा देवी, सुलोचना और लता ठाकुर ने बताया कि सरकार ने अस्पताल तो खोल दिए हैं, लेकिन चिकित्सक व रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती करना भूल गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। संवाद
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छह से सात लाख रुपये एक मशीन की कीमत
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, मनाली, बंजार और सीएचसी जरी में स्थापित प्रति मशीन की कीमत छह से सात लाख रुपये है, जो अब धूल फांक रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सात महीने और सीएच जरी में ढाई साल से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। हालांकि इससे पहले सीएचसी जरी के लिए कुल्लू अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट सप्ताह में एक बार अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जाता था। सिविल अस्पताल मनाली व बंजार में शुरू से ही रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली हैं। सिविल अस्पताल तेगुबेहड़ में अभी अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित नहीं हुई है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने मशीन खरीदने के लिए रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में हामी भरी है, लेकिन अब तक स्थापित नहीं हुई है।
250 रुपये का अल्ट्रासाउंड 1,600 रुपये में करवा रहे मरीज
निजी अस्पतालों में 1,400 से 1,600 रुपये में प्रति व्यक्ति अल्ट्रासाउंड हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 200 से 250 रुपये में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। निजी अस्पताल रेडियोलॉजिस्ट न होने का फायदा उठाकर मरीजों से लूट खसोट कर रहे हैं। इससे सैकड़ों लोग परेशान हो गए हैं। इन पांचों अस्पतालों में रोजाना 300 मरीज अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अस्पताल पहुंचते है, लेकिन ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पाकर ताला लगा मिलता है।
रेडियोलॉजिस्ट की जल्द होगी तैनाती : गोविंद
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि अस्पतालों में जल्द चिकित्सकों समेत रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी।
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कुल्लू। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदतर हालत है। इससे चार जिलों के मरीजों को परेशानी हो रही है। मरीज महंगे दाम पर निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं। आलम यह है कि कुल्लू के पांच बड़े अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है।
अस्पतालों में मरीजों के लंबे समय से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, सिविल अस्पताल तेगुबेहड़, बंजार, मनाली व सीएचसी जरी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, सिविल अस्पताल तेगुबेहड़ और मनाली, सीएचसी जरी में मशीनें होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अस्पतालों में लाखों रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हैं। हैरानी की बात है कि सिविल अस्पताल बंजार में अल्ट्रासाउंड मशीनें ही नहीं हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं।
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कुल्लू अस्पताल में मंगलवार को पहुंचे मरीज ज्ञान सिंह, सुरेश ठाकुर, केहर सिंह व श्यामा देवी, सुलोचना और लता ठाकुर ने बताया कि सरकार ने अस्पताल तो खोल दिए हैं, लेकिन चिकित्सक व रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती करना भूल गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। संवाद
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छह से सात लाख रुपये एक मशीन की कीमत
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, मनाली, बंजार और सीएचसी जरी में स्थापित प्रति मशीन की कीमत छह से सात लाख रुपये है, जो अब धूल फांक रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सात महीने और सीएच जरी में ढाई साल से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। हालांकि इससे पहले सीएचसी जरी के लिए कुल्लू अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट सप्ताह में एक बार अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जाता था। सिविल अस्पताल मनाली व बंजार में शुरू से ही रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली हैं। सिविल अस्पताल तेगुबेहड़ में अभी अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित नहीं हुई है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने मशीन खरीदने के लिए रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में हामी भरी है, लेकिन अब तक स्थापित नहीं हुई है।
250 रुपये का अल्ट्रासाउंड 1,600 रुपये में करवा रहे मरीज
निजी अस्पतालों में 1,400 से 1,600 रुपये में प्रति व्यक्ति अल्ट्रासाउंड हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 200 से 250 रुपये में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। निजी अस्पताल रेडियोलॉजिस्ट न होने का फायदा उठाकर मरीजों से लूट खसोट कर रहे हैं। इससे सैकड़ों लोग परेशान हो गए हैं। इन पांचों अस्पतालों में रोजाना 300 मरीज अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अस्पताल पहुंचते है, लेकिन ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पाकर ताला लगा मिलता है।
रेडियोलॉजिस्ट की जल्द होगी तैनाती : गोविंद
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि अस्पतालों में जल्द चिकित्सकों समेत रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी।