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Kullu News: गाहर घाटी में पारंपरिक गोची उत्सव का आगाज
Mon, 09 Feb 2026 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 09 Feb 2026 10:58 PM IST
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लाहौल के गोची उत्सव के लिए यूला (कूल्ज देवता बिलिंग)अठारह नाग देवता के स्थान पर पूजा अर्चना करत
देवता अठारह नाग की पूजा के साथ शुरू हुआ उत्सव, एकसाथ उत्सव मनाएंगे ग्रामीण
पारंपरिक खान-पान, लोक रीति-रिवाज और मेल-मिलाप होते हैं उत्सव का प्रमुख आकर्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल–स्पीति)। जनजातीय जिले की गाहर घाटी में पारंपरिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े गोची उत्सव का सोमवार को आगाज हुआ। उत्सव की शुरुआत बिलिंग गांव के आराध्य देवता अठारह नाग की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई।
पूजा के उपरांत पारंपरिक ग्रेक्स गीत गाए गए। रीति-रिवाजों के अनुसार गांव में सामूहिक रूप से उत्सव मनाया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर लोक परंपराओं को जीवंत किया। इस वर्ष बिलिंग गांव में चार परिवारों में पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर गोची उत्सव मनाया जा रहा है। इनमें लारजे जायलत्से नोरबू, स्वाची के जिगमेद उरज्ञान, पांस जितसेन नमसेल और गुमलिंगपा के जिगमेद तोबदन के परिवार शामिल हैं।
गोची उत्सव लाहौल की प्राचीन लोक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार यह पर्व पुत्र जन्म के अवसर पर मनाया जाता है। इसमें केवल संबंधित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव भागीदारी निभाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। बधाइयां और आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। देवता की पूजा के बाद गांव के लोग और नजदीकी रिश्तेदार एकत्र होकर सामूहिक रूप से जश्न मनाते हैं। इस दौरान पारंपरिक खान-पान, लोक रीति-रिवाज और मेल-मिलाप उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहते हैं।
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आज निभाई जाएगी तीर चलाने की परंपरा
गोची उत्सव की परंपरा के अनुसार मंगलवार को लबदागपा की ओर से तीर चलाकर अगले वर्ष पुत्र प्राप्ति से संबंधित भविष्यवाणी भी की जाएगी। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस भविष्यवाणी से आने वाले वर्ष के शुभ संकेत प्राप्त होते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गोची उत्सव केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी घाटी को जोड़ने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामूहिक जीवन मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
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प्यूकर गांव... बेटी के जन्म पर गांव को परोसी जाती है धाम
केलांग। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में पुत्र प्राप्ति पर जहां गोची उत्सव मनाने की परंपरा है, वहीं लाहौल घाटी के ही प्यूकर गांव में सदियों से बेटी के जन्म पर पूरे गांव को धाम परोसने की परंपरा है। यह परंपरा समाज में बेटा-बेटी की समानता को दर्शाती है। बीते वर्ष गांव में जिन परिवारों में बेटियों का जन्म हुआ था उनके उपलक्ष्य में आने वाले दिनों में प्यूकर गांव में गोची उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह परंपरा जनजातीय समाज में बेटी को सम्मान देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है।
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पारंपरिक खान-पान, लोक रीति-रिवाज और मेल-मिलाप होते हैं उत्सव का प्रमुख आकर्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल–स्पीति)। जनजातीय जिले की गाहर घाटी में पारंपरिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े गोची उत्सव का सोमवार को आगाज हुआ। उत्सव की शुरुआत बिलिंग गांव के आराध्य देवता अठारह नाग की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई।
पूजा के उपरांत पारंपरिक ग्रेक्स गीत गाए गए। रीति-रिवाजों के अनुसार गांव में सामूहिक रूप से उत्सव मनाया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर लोक परंपराओं को जीवंत किया। इस वर्ष बिलिंग गांव में चार परिवारों में पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर गोची उत्सव मनाया जा रहा है। इनमें लारजे जायलत्से नोरबू, स्वाची के जिगमेद उरज्ञान, पांस जितसेन नमसेल और गुमलिंगपा के जिगमेद तोबदन के परिवार शामिल हैं।
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गोची उत्सव लाहौल की प्राचीन लोक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार यह पर्व पुत्र जन्म के अवसर पर मनाया जाता है। इसमें केवल संबंधित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव भागीदारी निभाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। बधाइयां और आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। देवता की पूजा के बाद गांव के लोग और नजदीकी रिश्तेदार एकत्र होकर सामूहिक रूप से जश्न मनाते हैं। इस दौरान पारंपरिक खान-पान, लोक रीति-रिवाज और मेल-मिलाप उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहते हैं।
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आज निभाई जाएगी तीर चलाने की परंपरा
गोची उत्सव की परंपरा के अनुसार मंगलवार को लबदागपा की ओर से तीर चलाकर अगले वर्ष पुत्र प्राप्ति से संबंधित भविष्यवाणी भी की जाएगी। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस भविष्यवाणी से आने वाले वर्ष के शुभ संकेत प्राप्त होते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गोची उत्सव केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी घाटी को जोड़ने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामूहिक जीवन मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
प्यूकर गांव... बेटी के जन्म पर गांव को परोसी जाती है धाम
केलांग। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में पुत्र प्राप्ति पर जहां गोची उत्सव मनाने की परंपरा है, वहीं लाहौल घाटी के ही प्यूकर गांव में सदियों से बेटी के जन्म पर पूरे गांव को धाम परोसने की परंपरा है। यह परंपरा समाज में बेटा-बेटी की समानता को दर्शाती है। बीते वर्ष गांव में जिन परिवारों में बेटियों का जन्म हुआ था उनके उपलक्ष्य में आने वाले दिनों में प्यूकर गांव में गोची उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह परंपरा जनजातीय समाज में बेटी को सम्मान देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है।