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Kullu News: मणिकर्ण में डंपिंग साइट बनी पर्यटन निगम की जमीन

Sat, 08 Feb 2025 10:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Sat, 08 Feb 2025 10:34 PM IST
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Tourism Corporation's land becomes dumping site in Manikaran
मणिकर्ण में गंदगी का अड्डा बन गया पर्यटन निगम का टूटा हुआ होटल पार्वती।-संवाद
बाढ़ में बह गया था होटल, उसके बाद जगह को संभाल नहीं पा रहा निगम
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कूड़े के ढेर कर रहे मंदिर में दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं का स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण में पर्यटन निगम की जमीन पर गंदगी के ढेर लगे हैं। इस जगह पर्यटन निगम होटल था। यह बाढ़ में बह गया है, लेकिन उसके बाद निगम अपनी जमीन को नहीं संभाल पा रहा है। निगम की इस जमीन पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
इसके ठीक सामने पुरातन शिवालय, नैना माता मंदिर और राम मंदिर हैं। ऐसे में जो श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के लिए जाते हैं, उनका स्वागत गंदगी से हो रहा है। हालांकि, वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह ने पर्यटन निगम के कैफे एवं हॉट बाथ की सुविधा के लिए इसका शिलान्यास किया था, लेकिन सरकार बदलते ही यह शिलान्यास पट्टिका शोपीस बनकर रह गई। यहां कैफे और हाॅट बाथ बनाने की योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई है।
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बाढ़ में बह गया था होटल
वर्ष 1999 की बाढ़ में होटल पार्वती का एक हिस्सा नदी में बह गया था। वर्ष 2001 की बाढ़ में भी नुकसान हुआ। वर्ष 2003 तक होटल पूरी तरह से असुरक्षित हो गया था। अब सिर्फ एक हिस्से में होटल खंडहर बन गया है। इसकी दूसरी तरफ गंदगी के ढेर लगे हैं।
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--मणिकर्ण के पूर्व प्रधान नाथू राम और युवा विनोद ने बताया कि सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि हजारों पर्यटक एवं श्रद्धालु हर दिन आते हैं, लेकिन उनका स्वागत गंदगी से हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के बाद किसी भी सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
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सुरक्षा दीवार तक नहीं लगी
स्थानीय लोगों की मानें तो निगम और प्रशासन की ओर से इस जगह को साफ रखना तो दूर, इसे सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा दीवार तक नहीं लगाई गई है। क्षेत्र में साडा से सालाना करोड़ों रुपये आ रहे हैं, लेकिन पर्यटकों को सुविधा देने के नाम पर कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

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मणिकर्ण में निगम की भूमि पर जो कैफे और बॉथ बनाने की योजना थी। वह निदेशालय स्तर पर ही है। अभी उसे स्वीकृति नहीं मिली है। उसके बाद ही कुछ कार्य किया जा सकता है। - बीएस ओक्टा, डीजेएम, पर्यटन निगम
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