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Kullu News: ... आग के जख्मों को मिला भाईचारे का मरहम

Sun, 05 Jan 2025 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Sun, 05 Jan 2025 10:26 PM IST
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...the wounds of the fire got the balm of brotherhood
जिभी के तांदी गांव में अ​ग्नि प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री देने पहुंची कुल्लू की एक संस्था
तांदी अग्निकांड... प्रभावित परिवारों का दुख बांटने खाली हाथ नहीं आ रहा कोई भी शख्स
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कोई दे रहा आर्थिक मदद, कई लोग राशन-कपड़े और कुछ किचन सेट लेकर आ रहे गांव
भाईचारे से प्रभावितों की जीवन पटरी पर लाने की कवायद, देवसमाज भी मदद से पीछे नहीं
बलदेव राज
कुल्लू। कहते हैं कि मुसीबत और दुख के समय कंधे पर रखा हाथ दर्द कम कर देता है। छोटी सी मदद भी मुश्किल समय से निकालने में मददगार हो सकती है।
आपदा से नहीं लड़ सकते, लेकिन मिलकर दुखों की लड़ाई तो लड़ी जा सकती है। इसी राह पर चलते हुए देवभूमि कुल्लू के बंजार उपमंडल के तांदी गांव में भी अग्निकांड प्रभावितों का जीवन पटरी पर लाने के लिए लोगों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। कोई आर्थिक मदद कर रहा है तो कोई आटा-चावल, कपड़े, किचन सेट प्रभावितों को भेंट कर अपना फर्ज निभा रहा है। जिला प्रशासन के साथ कई समाजसेवी संस्थाएं भी मदद कर रही हैं। आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए रोजाना लोग भी प्रभावितों का दुख-दर्द बांटने आ रहे हैं। कोई भी ऐसा शख्स नहीं है, जो खाली हाथ प्रभावितों को ढांढस बंधाने आ रहा है। रिश्तेदार, समाजसेवा करने वाली संस्थाएं, राजनीतिक दलों के नेता और समाजसेवी भी कुछ न कुछ लेकर गांव में पहुंच रहे हैं। तांदी गांव में देवता शेषनाग जिभी का बंजार भी जलकर राख हुआ था। देवसमाज के जुड़े लोग भी मदद करने में पीछे नहीं हैं। वे भी प्रभावितों की हरसंभव सहायता करने का आश्वासन दे रहे हैं। संवाद
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चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी, मवेशियों के लिए घास की भी व्यवस्था
भीषण अग्निकांड में प्रभावित होने वाले परिवारों के पास मवेशियों को खिलाने के लिए चारा तक नहीं बचा है। सर्दियों के मौसम में मवेशियों के लिए रखी घास भी आग की भेंट चढ़ चुकी है। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी तक नहीं बची है। ऐसे में उनके लिए चारा और लकड़ी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में प्रभाविताें से मिलने आने वाले लोग चारे से लेकर चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी तक की व्यवस्था कर रहे हैं।
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अग्निकांड के पांच दिन बाद भी आंखों से छलक रहे आंसू
भीषण अग्निकांड की घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। आग की चपेट में आने से 33 परिवारों के 17 घर राख के ढेर में बदल चुके हैं। छह पशुशालाएं भी जलकर राख हो गई हैं। उजड़ चुके अपने आशियाने देखकर प्रभावित परिवारों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनके चेहरों पर काष्ठकुणी शैली से बने लकड़ी के मकानों को खोने का गम साफ देखा जा सकता है।
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तांदी गांव के लिए हर तरफ से मदद आ रही है। परिवारों की मदद से बंजार ही नहीं, बल्कि अन्य जगह से भी लोग पहुंच रहे हैं। सहायता करने के बाद भी लोग अपना संपर्क नंबर दे रहे हैं। लोगों की मदद प्रभावित परिवारों का जीवन पर पटरी पर लाने में काफी सहायक सिद्ध होगी। - परस राम, पंचायत प्रधान
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