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Kullu News: भुंतर स्कूल में गूंजा इंसान को इंसान ही रहने दो गीत
Mon, 28 Apr 2025 10:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 28 Apr 2025 10:08 PM IST
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भुंतर स्कूल में नाटक का मंचन करते रगंकर्मी केहर सिंह ठाकुर।-संवाद
नाटक के मंचन से उठाया गया समाज से यह बड़ा सवाल
भुंतर स्कूल में गूंजा इंसान को इंसान ही रहने दो गीत
भुंतर (कुल्लू)। रंगमंच गांव-गांव, आंगन-आंगन के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भुंतर में इंसान को इंसान ही रहने दो गीत खूब गूंजा। रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर ने एकल नाटक कहानियों की कहानी का सातवां मंचन किया।
नाटक की शुरुआत भोले बाबा और धर्म से परे इंसान को इंसान ही रहने दो गीत से हुई। गीत के माध्यम से समाज से सवाल किया गया कि आज हवा यह कैसी सहमी सी आई, हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई क्यों नहीं लगते अब भाई-भाई।
भेड़ और भेड़िए कहानी के माध्यम से संदेश दिया कि कैसे कई बार भेड़ों की तरह मासूम समाज के प्राणियों को शासन और प्रशासन की व्यवस्था देखने वाले कुछ चालाक लोग भेड़ियों की तरह मसल देते हैं। उन्हें झूूठे वादे कर अपना उल्लू सीधा कर छोड़ जाते हैं। प्रधानाचार्य तिलक राज ने कहा कि इस तरह की प्रस्तुतियां विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए कारगर सिद्ध हो सकती हैं। संवाद
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भुंतर स्कूल में गूंजा इंसान को इंसान ही रहने दो गीत
भुंतर (कुल्लू)। रंगमंच गांव-गांव, आंगन-आंगन के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भुंतर में इंसान को इंसान ही रहने दो गीत खूब गूंजा। रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर ने एकल नाटक कहानियों की कहानी का सातवां मंचन किया।
नाटक की शुरुआत भोले बाबा और धर्म से परे इंसान को इंसान ही रहने दो गीत से हुई। गीत के माध्यम से समाज से सवाल किया गया कि आज हवा यह कैसी सहमी सी आई, हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई क्यों नहीं लगते अब भाई-भाई।
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भेड़ और भेड़िए कहानी के माध्यम से संदेश दिया कि कैसे कई बार भेड़ों की तरह मासूम समाज के प्राणियों को शासन और प्रशासन की व्यवस्था देखने वाले कुछ चालाक लोग भेड़ियों की तरह मसल देते हैं। उन्हें झूूठे वादे कर अपना उल्लू सीधा कर छोड़ जाते हैं। प्रधानाचार्य तिलक राज ने कहा कि इस तरह की प्रस्तुतियां विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए कारगर सिद्ध हो सकती हैं। संवाद
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