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Kullu News: जतियों के साथ चिमटा-कांसी की मधुर ध्वनि से गूंजा बाह्य सराज
Thu, 27 Feb 2025 09:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 27 Feb 2025 09:46 PM IST
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शिवरात्रि को शिव महिमा गाते ग्रामीण। संवाद
महाशिवरात्रि पर रात भर चलता रहा भोले नाथ की महिमा के गुणगान का दौर
पुरानी परंपरा निभाने के लिए छुट्टी लेकर घर आते हैं नौकरीपेशा और अन्य लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। महाशिवरात्रि पर्व जिले के बाह्य सराज में धूमधाम से मनाया गया। घाटी में रात भर महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया। कई गांवों में यह दौर वीरवार दोपहर 2:00 बजे तक चला।
ढोल-नगाड़े, चिमटा और कांसी की मधुर ध्वनि के बीच लोगों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्माण किया। घर-घर जाकर लोगों ने महाशिवरात्रि पर्व पर जति गाकर मनोरंजन किया। इसमें गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शिव जी के सिर पर बहती गंगा... साईं म्हारा पाऊंण आओ सहित कई जतियां गाकर खूब मनोरंजन किया। रात भर नाच गान के बाद वीरवार सुबह तड़के पौ फटने से पहले भगवान शिव स्वरूप कैंपटू की माला (साईं) को देव परंपरा के साथ निकाला गया। लोगों ने महादेव से अगले वर्ष फिर आने और परिजनों को सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देने की कामना की। बाह्य सराज आनी, निरमंड, इनर सराज बंजार के साथ सीमांत लगते मंडी सराज में भी महाशिवरात्रि की धूम रही।
गांव बनाला, लोट, कोट, जुहड़, फनौटी, बिशलाधार, बालू, डोहाड़, सुहल, पकरेड के साथ पूरी घाटी में रातभर लोग नाचने-गाने में मशगूल रहे। बेली राम, प्रताप सिंह, संजय कुमार, राजू, झाबे राम, टेक सिंह और शेर सिंह ने कहा कि बाह्य सराज में मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि न केवल कुल्लू जिला, बल्कि हिमाचल में प्रसिद्ध है। लोग इस पर्व को मनाने के लिए दो से तीन हफ्ते पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। कहां कि सदियों पुरानी परंपरा का आज भी पूरी निष्ठा के साथ निर्वाहन किया जा जाता है। इसके लिए नौकरीपेशा और अन्य लोग छुट्टी लेकर महाशिवरात्रि मनाने घर आते हैं।
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पुरानी परंपरा निभाने के लिए छुट्टी लेकर घर आते हैं नौकरीपेशा और अन्य लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। महाशिवरात्रि पर्व जिले के बाह्य सराज में धूमधाम से मनाया गया। घाटी में रात भर महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया। कई गांवों में यह दौर वीरवार दोपहर 2:00 बजे तक चला।
ढोल-नगाड़े, चिमटा और कांसी की मधुर ध्वनि के बीच लोगों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्माण किया। घर-घर जाकर लोगों ने महाशिवरात्रि पर्व पर जति गाकर मनोरंजन किया। इसमें गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शिव जी के सिर पर बहती गंगा... साईं म्हारा पाऊंण आओ सहित कई जतियां गाकर खूब मनोरंजन किया। रात भर नाच गान के बाद वीरवार सुबह तड़के पौ फटने से पहले भगवान शिव स्वरूप कैंपटू की माला (साईं) को देव परंपरा के साथ निकाला गया। लोगों ने महादेव से अगले वर्ष फिर आने और परिजनों को सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देने की कामना की। बाह्य सराज आनी, निरमंड, इनर सराज बंजार के साथ सीमांत लगते मंडी सराज में भी महाशिवरात्रि की धूम रही।
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गांव बनाला, लोट, कोट, जुहड़, फनौटी, बिशलाधार, बालू, डोहाड़, सुहल, पकरेड के साथ पूरी घाटी में रातभर लोग नाचने-गाने में मशगूल रहे। बेली राम, प्रताप सिंह, संजय कुमार, राजू, झाबे राम, टेक सिंह और शेर सिंह ने कहा कि बाह्य सराज में मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि न केवल कुल्लू जिला, बल्कि हिमाचल में प्रसिद्ध है। लोग इस पर्व को मनाने के लिए दो से तीन हफ्ते पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। कहां कि सदियों पुरानी परंपरा का आज भी पूरी निष्ठा के साथ निर्वाहन किया जा जाता है। इसके लिए नौकरीपेशा और अन्य लोग छुट्टी लेकर महाशिवरात्रि मनाने घर आते हैं।
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