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Kullu News: राष्ट्रीय पक्षी मोर को भा गईं जगतसुख की बर्फीली वादियां

Mon, 02 Feb 2026 11:14 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Mon, 02 Feb 2026 11:14 PM IST
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The national bird peacock liked the snowy valleys of Jagatsukh.
क्षेत्र में दिखा मोर का जोड़ा, सोशल मीडिया में भी वायरल हो रहा वीडियो
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6500 फीट की ऊंचाई पर मोर दिखने आश्चर्यजनक बात मान रहे जानकार

आबोहवा में बदलाव भी कारण, आमतौर पर 1,600 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है मोर

संवाद न्यूज एजेंसी

मनाली। राष्ट्रीय पक्षी मोर को जगतसुख की बर्फीली वादियां भा गई हैं। क्षेत्र में मोर देखा गया है। सोशल मीडिया में इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।
मौसम चक्र और आबोहवा में आ रहे बदलाव को इसका कारण माना जा रहा है। लगभग 6500 फीट की ऊंचाई पर मोर का दिखना एक आश्चर्यजनक बात है।

जानकारों का कहना है कि यह मैदानी पक्षी आमतौर पर लगभग 1,600 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह हिमालय में पारिस्थितिक परिवर्तनों और वायुमंडलीय तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि के संकेत हैं। हिमाचल के निचले इलाकों में मोर पहले भी देखे गए हैं लेकिन मनाली में पहली बार मोर की दस्तक वन्यप्राणी प्रेमियों के लिए चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां मोर का जोड़ा है। बर्फबारी से पहले भी देखा गया था। जगतसुख के नितिन, भूमि ने बताया कि जमलू देवता के देवस्थल के आसपास मोर को देखा गया है।
वन्य प्राणी विभाग के वन मंडलाधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि मोर एक ऐसी प्रजाति का पक्षी है जो अपने आवास को लेकर ज्यादा चुनिंदा नहीं होता। हालांकि परंपरागत रूप से यह मैदानी इलाकों का पक्षी है लेकिन हिमाचल में भी इसे देखा गया है। कुछ साल पहले डोभी के जंगल से एक मोर को रेस्क्यू भी किया गया था। शर्मा का मानना है कि इस बदलाव का एक कारण यह हो सकता है कि पहाड़ी क्षेत्र अब पहले की तरह ठंडे नहीं रहे जिससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र मोरों के रहने के लिए अधिक अनुकूल हो गए हैं।
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वन्य प्राणी विभाग से सेवानिवृत्त अरण्यपाल बीएस राणा ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई पर मोर का मिलना यही संकेत है कि हमारे मौसम चक्र और पर्यावरण में बदलाव आ रहा है। वन्य प्राणी सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पर्यावरण विद किशन लाल का कहना है कि मोर का आना पर्यावरण बदलाव का संकेत है। हमें अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए।
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