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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu News ›   The historic two-day fair at Ranikot in Ani has commenced with the arrival of the deity.

Kullu News: आनी के रानीकोट का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला देव आगमन के साथ शुरू

Sun, 06 Sep 2026 11:07 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:07 PM IST
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The historic two-day fair at Ranikot in Ani has commenced with the arrival of the deity.
आनी के रानीकोट में देव आगमन के साथ शुरू हुआ दो दिवसीय पारंपरिक मेला। संवाद
आनी (कुल्लू)। उपमंडल आनी की कराणा पंचायत के घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित रानीकोट में दो दिवसीय पारंपरिक मेला रविवार से शुरू हो गया। क्षेत्र के आराध्य देवता कुइंरी और पनेउई नाग के आगमन के साथ देव परंपरा से जुड़ा यह ऐतिहासिक मेला शुरू हुआ।
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प्राचीन समय से चली आ रही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में क्षेत्र की करीब दस पंचायतों के ग्रामीण भाग ले रहे हैं। रानीकोट का यह मेला अपनी ऐतिहासिक मान्यताओं और समृद्ध देव संस्कृति के लिए विशेष पहचान रखता है। मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में क्षेत्र में गोमाता को एक भयंकर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे बड़ी संख्या में गायों की मृत्यु हो गई थी।
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बीमारी के प्रकोप से क्षेत्र के लोग चिंतित हो गए और अपने-अपने आराध्य देवताओं की शरण में पहुंचे। लोक मान्यता के अनुसार देवताओं ने भविष्यवाणी करते हुए क्षेत्र की जनता को रानीकोट नामक स्थान पर हर वर्ष बीस भादों के दिन से मेले के आयोजन का आदेश दिया। देव आदेश की पालना करते हुए क्षेत्र के लोगों ने घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित रानीकोट में इस मेले का आयोजन शुरू किया।
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बताया जाता है कि इसके बाद क्षेत्र के लोगों को उस भयंकर बीमारी से निजात मिली। तभी से यह मेला धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में आज तक निरंतर मनाया जा रहा है। देवता कुइंरी के कारदार इंद्र सिंह और पनेउई नाग के माल सिंह ने बताया कि दोनों देवताओं के आगमन के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष की भांति इस बार भी मेले में भारी जनसमूह उमड़ रहा है और क्षेत्र के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मेले के दौरान महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में देवनाटी डालकर अपनी समृद्ध एवं प्राचीन लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। घने देवदार के जंगलों के बीच देव परंपराओं और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

दो दिवसीय इस ऐतिहासिक मेले में देवताओं के देवलुओं सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। मेले में पहुंच रहे श्रद्धालु देव आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ-साथ पारंपरिक देवनाटी और लोक संस्कृति का आनंद भी उठा रहे हैं।
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