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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu News ›   The fourth Dev Sansad was held in Naggar Jagti Patt of Kullu.

Kullu News: कुल्लू के नग्गर जगती पट्ट में हुई चौथी देव संसद

Fri, 31 Oct 2025 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Fri, 31 Oct 2025 10:26 PM IST
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The fourth Dev Sansad was held in Naggar Jagti Patt of Kullu.
कुल्लू जिला के नगर में जगती पट्ट पर आयोजित जगती में पहुंचे कुल्लू,लाहौल और मंडी के देवताओ के नि
सबसे पहले 2006 में स्की विलेज को रद्द करने को बुलाई थी जगती
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मानव पर आने वाली विपदा के निवारण को बुलाई जाती है जगती

अमी चंद भंडारी

खराहल (कुल्लू)। देव-देवताओं के आदेश पर कुल्लू के एतिहासिक नग्गर जगती पट में देव संसद हुई। कुल्लू की प्राचीन राजधानी नग्गर के कैसल में चौथी बड़ी जगती में सैकड़ों देवी-देवता के निशान के साथ कारकून पहुंचे।
कुल्लू दशहरा के बाद एक बार फिर सैकड़ों देवी-देवताओं ने देव संसद में भाग लिया। जब मानवता पर कोई गंभीर संकट आता है तो देवी-देवताओं के आदेश पर जगती बुलाई जाती है। कुल्लू में देव संसद का अभी तक चार बार आयोजन देव परंपरा के अनुसार हुआ है।
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जगती में अठारह करडू का धड़छ देव विधि विधान से लाया जाता है। अठारह करडू का नग्गर में पहुंचने पर माता त्रिपुरा सुंदरी भव्य स्वागत करती हैं। कुल्लू के राजघराने से रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह विशेष तौर पर उपस्थित रहते हैं। अधिष्ठात्री देवी हिडिंबा के आदेश पर देव संसद हुई। इस बार हिमाचल के विभिन्न जिलाें के साथ कुल्लू में भी आपदा से जानमाल की बड़ी क्षति हुई है।
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इससे पहले 2006 में स्की विलेज को रद्द करने के बारे में जगती बुलाई गई थी। 2014 बलि प्रथा और 2021 में कोविड-19 के संबंध में जगती का आयोजन हुआ है।

जिला कुल्लू देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि जगती में गूर के माध्यम से कहा गया है कि देवी-देवताओ के स्थानों पर छेड़खानी हुई। इससे लोग बाज आएं नहीं तो आगे अच्छा नहीं दिख रहा।

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क्या है जगती

धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर संकट होने की सूरत में देव समाज के लोग जगती का आयोजन करते हैं। महामारी और अकाल पर भी बड़ी जगती नग्गर में बुलाई जाती है। जगती पूछ में जिला कुल्लू सहित मंडी के भी कई देवी-देवता के निशान के साथ कारकून आते हैं। यहां गूर के माध्यम से संकट को टालने का उपाय बताया जाता है।

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नग्गर कैसल में है जगती पट्ट

जगती पट्ट मंदिर रियायत कालीन राजधानी नग्गर कैसल में है। इसे अठारह करडू के सौह के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में स्थापित स्लेटनुमा शिला के बारे में बताया जाता है कि अठारह करोड़ देवी-देवताओ ने मधुमक्खियों का रूप धारण कर इसे स्वयं उठाकर यहां लाया है।
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