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Kullu News: जिस्पा फेस्टिवल में रमेश ठाकुर के गानों पर झूमे दर्शक
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लाहौल के जिसपा उत्सव में नृत्य करते कलाकार। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। दो दिवसीय जिस्पा फेस्टिवल की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में रविवार को लोकगायकों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर खूब वाहवाही लूटी। स्टार नाइट में प्रसिद्ध लोकगायक रमेश ठाकुर ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
उनके गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते और थिरकते रहे। रमेश ठाकुर ने कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति गीत से की। इसके बाद उन्होंने हिंदी, कुल्लवी, लाहौली, लद्दाखी और पुराने सदाबहार गीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर माहौल को संगीतमय बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ अखिल भारतीय नेपाली मूल प्रवाह एकता के कलाकार कुमार लामा ने नेपाली गीत से किया। इसके बाद लेह से आए कलाकारों ने छेवांग पलजोर के नेतृत्व में लद्दाखी लोकनृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। आकाश लोंचेनपा ने लद्दाखी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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किन्नौर के हंगरंग और चांगो से आए कलाकारों ने पारंपरिक किन्नौरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। वहीं, स्पीति के कलाकारों ने स्थानीय लोकगीतों पर मनमोहक लोकनृत्य पेश किया। नेपाली मूल प्रवाह, मनाली के कलाकारों की नेपाली गीतों पर प्रस्तुति को भी दर्शकों ने खूब सराहा। लाहौल के गायक अनिल सूर्यवंशी ने लाहौली, लद्दाखी और फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
उनके गीतों पर दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने को मजबूर हो गए। किन्नौर की बहनें साधिका और समीक्षा नेगी की जुगलबंदी भी आकर्षण का केंद्र रही।
दोनों कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। लाहौल की गायिका रोजी शर्मा ने लाहौली, पांगी और लद्दाखी गीतों की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, फुरबू नेगी ने पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
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उनके गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते और थिरकते रहे। रमेश ठाकुर ने कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति गीत से की। इसके बाद उन्होंने हिंदी, कुल्लवी, लाहौली, लद्दाखी और पुराने सदाबहार गीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर माहौल को संगीतमय बना दिया।
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सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ अखिल भारतीय नेपाली मूल प्रवाह एकता के कलाकार कुमार लामा ने नेपाली गीत से किया। इसके बाद लेह से आए कलाकारों ने छेवांग पलजोर के नेतृत्व में लद्दाखी लोकनृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। आकाश लोंचेनपा ने लद्दाखी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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किन्नौर के हंगरंग और चांगो से आए कलाकारों ने पारंपरिक किन्नौरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। वहीं, स्पीति के कलाकारों ने स्थानीय लोकगीतों पर मनमोहक लोकनृत्य पेश किया। नेपाली मूल प्रवाह, मनाली के कलाकारों की नेपाली गीतों पर प्रस्तुति को भी दर्शकों ने खूब सराहा। लाहौल के गायक अनिल सूर्यवंशी ने लाहौली, लद्दाखी और फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
उनके गीतों पर दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने को मजबूर हो गए। किन्नौर की बहनें साधिका और समीक्षा नेगी की जुगलबंदी भी आकर्षण का केंद्र रही।
दोनों कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। लाहौल की गायिका रोजी शर्मा ने लाहौली, पांगी और लद्दाखी गीतों की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, फुरबू नेगी ने पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।