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Kullu News: बंजार के बलागाड़ में मनाया त्वार पर्व
Sun, 16 Feb 2025 09:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 16 Feb 2025 09:47 PM IST
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बंजार के बलागाड़ में तवार उत्सव के दौरान उमड़ी भीड़।-ग्रामीण।
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार के बलागाड़ में त्वार पर्व मनाया गया। पर्व में देवता महर्षि मार्कंडेय तथा माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के सम्मान में हुआ।
देव परंपरा के अनुसार रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आराध्य देवी-देवता के समक्ष शीश नवाया और पुरातन परंपरा के साक्षी बने। बता दें कि फाल्गुन मास के आरंभ होते ही
जिला कुल्लू और उपमंडल बंजार के कई क्षेत्रों में त्वार पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बड़ा पुरातन माना जाता है। साथ ही पर्व का तथ्य रोचक व काफी पौराणिक है। दंत कथाओं के अनुसार और बुजुर्गों कि मानें तो ...आयो महिना फाल्गुन फागूए खिलदे जिनके गिए परदेश केसर बोलदीए (फाल्गुन का महिना आया है फागू खिलने लगे हैं, जिनके घर से कोई बाहर गया हो, तो कोयल उनका संदेश वंसत व फाल्गुन मास में लाती है)। इस माह में कई नई आत्माओं की उत्पति होती है। पौष माह में उपमंडल बंजार के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर शक्ति अर्जित करने के लिए गए और फाल्गुन मास में सभी देवी-देवता शक्तियां अर्जित कर प्रकट होते हैं। कहा कि यह पर्व उपमंडल बंजार के बला, लांहूड, चैंहणी, तांदी, सजबाड आदि कई गांवों में हर साल मनाया जाता है।
-संवाद
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देव परंपरा के अनुसार रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आराध्य देवी-देवता के समक्ष शीश नवाया और पुरातन परंपरा के साक्षी बने। बता दें कि फाल्गुन मास के आरंभ होते ही
जिला कुल्लू और उपमंडल बंजार के कई क्षेत्रों में त्वार पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बड़ा पुरातन माना जाता है। साथ ही पर्व का तथ्य रोचक व काफी पौराणिक है। दंत कथाओं के अनुसार और बुजुर्गों कि मानें तो ...आयो महिना फाल्गुन फागूए खिलदे जिनके गिए परदेश केसर बोलदीए (फाल्गुन का महिना आया है फागू खिलने लगे हैं, जिनके घर से कोई बाहर गया हो, तो कोयल उनका संदेश वंसत व फाल्गुन मास में लाती है)। इस माह में कई नई आत्माओं की उत्पति होती है। पौष माह में उपमंडल बंजार के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर शक्ति अर्जित करने के लिए गए और फाल्गुन मास में सभी देवी-देवता शक्तियां अर्जित कर प्रकट होते हैं। कहा कि यह पर्व उपमंडल बंजार के बला, लांहूड, चैंहणी, तांदी, सजबाड आदि कई गांवों में हर साल मनाया जाता है।
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-संवाद