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स्ट्रेचर बाइक खरीद पर फूंक दिए दो लाख
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कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में धूल फाक रही है स्ट्रैचर बाइक। -संवाद
- फोटो : Kullu
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में लोगों की सुविधा के लिए सरकार की ओर से भेजी गई एक स्ट्रेचर बाइक सात माह से शोपीस बनी हुई है। बाइक पर दो लाख रुपये फूंकने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने सेवा शुरू नहीं की है, जो क्षेत्रीय अस्पताल में धूल फांक रही है। इससे मरीजों को स्ट्रेचर बाइक का लाभ नहीं मिल रहा है। यह बाइक उन जगहों से मरीजों को अस्पताल लाने के लिए दी गई थी, जहां एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने बाइक के लिए चालक न होने का हवाला दिया है। बता दें कि सात महीने पहले सरकार ने प्रदेश के चुनिंदा अस्पतालों को स्ट्रेचर बाइक मुहैया करवाई थी। बाइक के साथ स्ट्रेचर की सुविधा है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को घर से सड़क तक लाने में किसी तरह की परेशान न हो। अगर जिला मुख्यालय की बता करें तो तंग गलियां होने के कारण कई मार्गों में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में स्ट्रेचर बाइक मरीजों के लिए मददगार साबित होनी थी। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने बताया कि चालक न होने से स्ट्रेचर बाइक चलाने में दिक्कत आ रही है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों में मददगार साबित होनी थी बाइक
जिले के दुर्गम क्षेत्रों में स्ट्रेचर बाइक मरीजों के लिए मददगार साबित होनी थी। इन क्षेत्रों में सड़क का अभाव है। ऐसे में गांव तक एंबुलेंस का पहुंच पाना संभव नहीं होता है, जबकि स्ट्रेचर बाइक आसानी से पहुंच सकती है। इस बाइक पर मरीज को गांव से बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जा सकता है। सड़क न होने से ग्रामीण मरीजों को पीठ या चारपाई पर उठाकर सड़क तक पहुंचाते हैं। इससे भारी परेशानियां का सामना करना पड़ता है।
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कुल्लू। जिला क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में लोगों की सुविधा के लिए सरकार की ओर से भेजी गई एक स्ट्रेचर बाइक सात माह से शोपीस बनी हुई है। बाइक पर दो लाख रुपये फूंकने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने सेवा शुरू नहीं की है, जो क्षेत्रीय अस्पताल में धूल फांक रही है। इससे मरीजों को स्ट्रेचर बाइक का लाभ नहीं मिल रहा है। यह बाइक उन जगहों से मरीजों को अस्पताल लाने के लिए दी गई थी, जहां एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने बाइक के लिए चालक न होने का हवाला दिया है। बता दें कि सात महीने पहले सरकार ने प्रदेश के चुनिंदा अस्पतालों को स्ट्रेचर बाइक मुहैया करवाई थी। बाइक के साथ स्ट्रेचर की सुविधा है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को घर से सड़क तक लाने में किसी तरह की परेशान न हो। अगर जिला मुख्यालय की बता करें तो तंग गलियां होने के कारण कई मार्गों में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में स्ट्रेचर बाइक मरीजों के लिए मददगार साबित होनी थी। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने बताया कि चालक न होने से स्ट्रेचर बाइक चलाने में दिक्कत आ रही है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
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दुर्गम क्षेत्रों में मददगार साबित होनी थी बाइक
जिले के दुर्गम क्षेत्रों में स्ट्रेचर बाइक मरीजों के लिए मददगार साबित होनी थी। इन क्षेत्रों में सड़क का अभाव है। ऐसे में गांव तक एंबुलेंस का पहुंच पाना संभव नहीं होता है, जबकि स्ट्रेचर बाइक आसानी से पहुंच सकती है। इस बाइक पर मरीज को गांव से बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जा सकता है। सड़क न होने से ग्रामीण मरीजों को पीठ या चारपाई पर उठाकर सड़क तक पहुंचाते हैं। इससे भारी परेशानियां का सामना करना पड़ता है।
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