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साइमन कमीशन गो बैक के नारों गूंजा कलाकेंद्र
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कलाकेंद्र कुल्लू में नाटक के मंचन में अपनी प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र कुल्लू साइमन कमीशन गो बैक के नारों से गूंज उठा। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कुल्लू नाट्योत्सव मनाया जा रहा है।
शनिवार शाम को दुर्गा बाई आर्य नाटक के मंचन के साथ नाट्योत्सव का आगाज हुआ। एकाग्र कला मंच कुल्लू के कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों का इतिहास से परिचय करवाया। रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर लिखित नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी ममता ने किया। बता दें कि नाटक में ऊना जिले की दुर्गा बाई आर्य के संघर्ष के बारे में बताया गया कि कैसे उन्होंने महिला होने के बावजूद देश की आजादी में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
उन्होंने सारा जीवन महात्मा गांधी के पद्चिह्नों पर चलते हुए आजादी के लिए न्योछावर कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में प्रवेश पाकर सपरिवार उन्होंने खादी पहनने का प्रण लिया। महिलाओं को संगठित कर महिला खादी संगठन बनाकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। उनके तीन बेटों तथा पति बाबा लछमण दास आर्य ने साइमन कमीशन, भारत छोड़ो आदि कई आंदोलनों में भाग लिया।
भारत की आजादी तक वह लड़ती रहीं और स्वतंत्रता मिलने के बाद चुपचाप घरेलू कार्यों में व्यस्त हो गईं। रंगकर्मी केहर सिंह ने कहा कि एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू, संस्कार भारती और भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कुल्लू नाट्योत्सव मनाया जा रहा है। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया जा रहा है। मंच पर कल्पना, प्रेरणा, वंदना, सकीना, लक्ष्मी, रिया, दीपाली और कुमकुम ने प्रस्तुति दी। इस दौरान भरत, मीनाक्षी, जीवानंद, वैभव ठाकुर आदि उपस्थित रहे।
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शनिवार शाम को दुर्गा बाई आर्य नाटक के मंचन के साथ नाट्योत्सव का आगाज हुआ। एकाग्र कला मंच कुल्लू के कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों का इतिहास से परिचय करवाया। रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर लिखित नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी ममता ने किया। बता दें कि नाटक में ऊना जिले की दुर्गा बाई आर्य के संघर्ष के बारे में बताया गया कि कैसे उन्होंने महिला होने के बावजूद देश की आजादी में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
उन्होंने सारा जीवन महात्मा गांधी के पद्चिह्नों पर चलते हुए आजादी के लिए न्योछावर कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में प्रवेश पाकर सपरिवार उन्होंने खादी पहनने का प्रण लिया। महिलाओं को संगठित कर महिला खादी संगठन बनाकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। उनके तीन बेटों तथा पति बाबा लछमण दास आर्य ने साइमन कमीशन, भारत छोड़ो आदि कई आंदोलनों में भाग लिया।
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भारत की आजादी तक वह लड़ती रहीं और स्वतंत्रता मिलने के बाद चुपचाप घरेलू कार्यों में व्यस्त हो गईं। रंगकर्मी केहर सिंह ने कहा कि एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू, संस्कार भारती और भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कुल्लू नाट्योत्सव मनाया जा रहा है। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया जा रहा है। मंच पर कल्पना, प्रेरणा, वंदना, सकीना, लक्ष्मी, रिया, दीपाली और कुमकुम ने प्रस्तुति दी। इस दौरान भरत, मीनाक्षी, जीवानंद, वैभव ठाकुर आदि उपस्थित रहे।
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