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Kullu News: पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर ने रोके प्रत्याशियों के कदम
Wed, 19 Nov 2025 06:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 19 Nov 2025 06:53 AM IST
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पतलीकूहल (कुल्लू)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की आहट के साथ ऊझी घाटी सहित जिलाभर के ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल अचानक तेज हो गया है।
वहीं, आरक्षण रोस्टर जारी न होने के कारण अधिकांश संभावित प्रत्याशी अभी भी अंतिम फैसले की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। चर्चाओं का दौर तो शुरू हो चुका है लेकिन प्रत्याशियों की चुनाव मैदान में आधिकारिक एंट्री रोस्टर की घोषणा पर ही निर्भर है।
पिछले दिनों पंचायत चुनावों के स्थगित होने के चलते कई प्रत्याशियों में निराशा है। कई लोगों ने चुनावी तैयारियां लगभग छोड़ दी थीं लेकिन अब फिर से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। हालांकि, अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अधिकांश संभावित प्रत्याशी खुले रूप से चुनाव घोषणा करने के बजाय यह कहते नजर आ रहे हैं कि पहले रोस्टर आ जाए, उसके बाद फैसला करेंगे।
पंचायत स्तर पर प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य पदों के आरक्षण में हर बार बड़ा फेरबदल होता है। ऐसे में कई बार जिस व्यक्ति ने प्रधान पद के लिए वर्षों तक मेहनत की होती है, वह किसी आरक्षित श्रेणी में आने के बाद चुनाव लड़ ही नहीं पाता। गांवों के चौक-चौराहों, दुकानों में चुनावी चर्चाएं चरम पर हैं। संवाद
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वहीं, आरक्षण रोस्टर जारी न होने के कारण अधिकांश संभावित प्रत्याशी अभी भी अंतिम फैसले की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। चर्चाओं का दौर तो शुरू हो चुका है लेकिन प्रत्याशियों की चुनाव मैदान में आधिकारिक एंट्री रोस्टर की घोषणा पर ही निर्भर है।
पिछले दिनों पंचायत चुनावों के स्थगित होने के चलते कई प्रत्याशियों में निराशा है। कई लोगों ने चुनावी तैयारियां लगभग छोड़ दी थीं लेकिन अब फिर से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। हालांकि, अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अधिकांश संभावित प्रत्याशी खुले रूप से चुनाव घोषणा करने के बजाय यह कहते नजर आ रहे हैं कि पहले रोस्टर आ जाए, उसके बाद फैसला करेंगे।
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पंचायत स्तर पर प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य पदों के आरक्षण में हर बार बड़ा फेरबदल होता है। ऐसे में कई बार जिस व्यक्ति ने प्रधान पद के लिए वर्षों तक मेहनत की होती है, वह किसी आरक्षित श्रेणी में आने के बाद चुनाव लड़ ही नहीं पाता। गांवों के चौक-चौराहों, दुकानों में चुनावी चर्चाएं चरम पर हैं। संवाद
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