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Kullu News: दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा
Mon, 13 Oct 2025 09:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 13 Oct 2025 09:39 PM IST
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रकाश चंद राणा की अदालत ने एक अभियुक्त को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अतिरिक्त दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माने भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 376AB और 506 के तहत दोषी ठहराया है। धारा 506 के तहत उसे 2 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की भी सजा दी गई है।
इसके अतिरिक्त अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों की पीड़ित को योजना-2018 के तहत, पोक्सो अधिनियम की धारा 33(8) और पोक्सो नियम 2020 के नियम 9 को ध्यान में रखते हुए 30 दिनों के भीतर पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम के अनुसार 2019 में पीड़ित बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दी थी कि आरोपी जो रिश्ते में बच्ची का चाचा (पिता का चचेरा भाई) है ने उसके साथ गलत कार्य किया। जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने आरोप सिद्ध करने के लिए 11 गवाहों के बयान दर्ज करवाए जिसके आधार पर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रकाश चंद राणा की अदालत ने एक अभियुक्त को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अतिरिक्त दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माने भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 376AB और 506 के तहत दोषी ठहराया है। धारा 506 के तहत उसे 2 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की भी सजा दी गई है।
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इसके अतिरिक्त अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों की पीड़ित को योजना-2018 के तहत, पोक्सो अधिनियम की धारा 33(8) और पोक्सो नियम 2020 के नियम 9 को ध्यान में रखते हुए 30 दिनों के भीतर पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम के अनुसार 2019 में पीड़ित बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दी थी कि आरोपी जो रिश्ते में बच्ची का चाचा (पिता का चचेरा भाई) है ने उसके साथ गलत कार्य किया। जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने आरोप सिद्ध करने के लिए 11 गवाहों के बयान दर्ज करवाए जिसके आधार पर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।