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Kullu News: राहत बन बरसे बादल, कुल्लू में वायरल के मरीज भी होंगे कम
Fri, 23 Jan 2026 10:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 23 Jan 2026 10:44 PM IST
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जिले के लोगों को शुष्क ठंड से राहत दिलाएगी बारिश की फुहार
मौसमी बदलाव फेफड़ों के लिए भी होगा फायदेमंद
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले में चार महीने बाद बादल बरसे हैं। बारिश और बर्फबारी होने से अब वायरल के मरीजों की संख्या में कमी आने के आसार हैं। लंबे समय से जारी शुष्क ठंड से बारिश राहत लेकर आएगी।
इससे वायु प्रदूषण कम होगा और सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी के मरीजों में कमी आएगी। बारिश से हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और वातावरण में नमी बढ़ेगी। इससे गले की खराश और खांसी-जुकाम के मामलों में लोगों राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि चार माह से बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए थे। इस वजह से हवा में प्रदूषण के कण पीएम2.5 फैल रहा थे और लोग वायरल की चपेट में आ रहे थे। अब बारिश के कारण हवा में फैले प्रदूषण के कण जम कर नीचे बैठ जाएंगे। इससे धुंध, कोहरे के साथ शुष्क ठंड से राहत मिलेगी। तापमान में बदलाव और वातावरण में नमी बढ़ने से वायरस का प्रसार कम होगा। इससे सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मरीजों को राहत मिलेगी। यह मौसमी बदलाव मनुष्य के फेफड़ों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि बारिश वायु प्रदूषण को कम कर हवा को साफ करेगी। मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ. कल्याण ठाकुर और नितेश कुमार ने कहा कि शुष्क मौसम में वायु प्रदूषण लोगों को वायरल की चपेट में लाने का मुख्य साधन है। हवा में प्रदूषण के कण पीएम 2.5 फैलने से लोग वायरल की चपेट में आ जाते हैं लेकिन बारिश से हवा में नमी आएगी और प्रदूषण के कणों में कमी आएगी। इससे वायरल के मरीजों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद अधिक है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद तापमान में गिरावट हो सकती है, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों को ठंडी हवा से बचने की जरूरत है।
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मौसमी बदलाव फेफड़ों के लिए भी होगा फायदेमंद
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिले में चार महीने बाद बादल बरसे हैं। बारिश और बर्फबारी होने से अब वायरल के मरीजों की संख्या में कमी आने के आसार हैं। लंबे समय से जारी शुष्क ठंड से बारिश राहत लेकर आएगी।
इससे वायु प्रदूषण कम होगा और सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी के मरीजों में कमी आएगी। बारिश से हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और वातावरण में नमी बढ़ेगी। इससे गले की खराश और खांसी-जुकाम के मामलों में लोगों राहत मिलेगी।
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गौरतलब है कि चार माह से बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए थे। इस वजह से हवा में प्रदूषण के कण पीएम2.5 फैल रहा थे और लोग वायरल की चपेट में आ रहे थे। अब बारिश के कारण हवा में फैले प्रदूषण के कण जम कर नीचे बैठ जाएंगे। इससे धुंध, कोहरे के साथ शुष्क ठंड से राहत मिलेगी। तापमान में बदलाव और वातावरण में नमी बढ़ने से वायरस का प्रसार कम होगा। इससे सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मरीजों को राहत मिलेगी। यह मौसमी बदलाव मनुष्य के फेफड़ों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि बारिश वायु प्रदूषण को कम कर हवा को साफ करेगी। मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ. कल्याण ठाकुर और नितेश कुमार ने कहा कि शुष्क मौसम में वायु प्रदूषण लोगों को वायरल की चपेट में लाने का मुख्य साधन है। हवा में प्रदूषण के कण पीएम 2.5 फैलने से लोग वायरल की चपेट में आ जाते हैं लेकिन बारिश से हवा में नमी आएगी और प्रदूषण के कणों में कमी आएगी। इससे वायरल के मरीजों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद अधिक है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद तापमान में गिरावट हो सकती है, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों को ठंडी हवा से बचने की जरूरत है।
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