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सूखे जैसे हालात से पेड़ों पर फटने लगे अनार
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू के निचले क्षेत्र में अब अनार की फसल पर सूखे जैसे हालात की मार पड़ी है। इससे अनार उत्पादक चिंतित हो गए हैं। सूखे के कारण अनार का आकार नहीं बढ़ पा रहा, जबकि गुणवत्ता भी कम हो गई है। बागवानों को डर सता रहा है कि कहीं सूखे जैसे हालात अनार की मिठास न छीन ले।
अब बागवानों को भारी नुकसान की चिंता सता रही है। जिले में 2,000 हेक्टेयर भूमि पर अनार का उत्पादन बागवान कर रहे हैं। इसमें बजौरा, हुरला, थरास, कलैहली, तरगाली, रूआड़ू और खराहल आदि क्षेत्र शामिल हैं।
बता दें कि जिले में बागवान अनार की खेती बड़े पैमाने में कर रहे है। बेहतर दाम मिलने से अनार उत्पादकों की आर्थिकी मजबूत हो रही है, लेकिन इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से सूखे की मार अनार की फसल पर पड़ी है। बागवानों का कहना है कि प्री मानसून जल्द नहीं आया तो इससे फसल को अधिक नुकसान हो सकता है।
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पिछले डेढ़ दशक में जिले में अनार ने अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। अनार उत्पादक अर्जन महंत, सुनू राम, अशोक, ज्ञान ठाकुर, दुनी चंद, चमन ने बताया कि इस साल सूखे जैसे हालात की वजह से फसल को नुकसान हो रहा है। इसका असर अनार के आकार और गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। लंबे समय से पर्याप्त बारिश न होने से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल मंडियों में अनार 130 से 150 रुपये प्रति किलो बिका था। उधर, बागवानी विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. बीएम चौहान ने बताया कि बागवानों को अनार की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विभाग प्रयासरत है, लेकिन इस बार सूखे का प्रभाव फल के विकास और गुणवत्ता पर पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है, वहां पर बागवान सिंचाई करें।
विभिन्न किस्मों का हो रहा उत्पादन
जिला कुल्लू में विभिन्न किस्मों का अनार पैदा हो रहा है। इसमें कंधारी, काबुली, गणेश, सिंधुरी और कंधारी बीज रहित, मृदुला बीज रहित शामिल हैं। अनार में कई पोषक तत्व भी विद्यमान हैं। इसके सेवन से कई बीमारियां से निजात मिलती है।
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कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू के निचले क्षेत्र में अब अनार की फसल पर सूखे जैसे हालात की मार पड़ी है। इससे अनार उत्पादक चिंतित हो गए हैं। सूखे के कारण अनार का आकार नहीं बढ़ पा रहा, जबकि गुणवत्ता भी कम हो गई है। बागवानों को डर सता रहा है कि कहीं सूखे जैसे हालात अनार की मिठास न छीन ले।
अब बागवानों को भारी नुकसान की चिंता सता रही है। जिले में 2,000 हेक्टेयर भूमि पर अनार का उत्पादन बागवान कर रहे हैं। इसमें बजौरा, हुरला, थरास, कलैहली, तरगाली, रूआड़ू और खराहल आदि क्षेत्र शामिल हैं।
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बता दें कि जिले में बागवान अनार की खेती बड़े पैमाने में कर रहे है। बेहतर दाम मिलने से अनार उत्पादकों की आर्थिकी मजबूत हो रही है, लेकिन इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से सूखे की मार अनार की फसल पर पड़ी है। बागवानों का कहना है कि प्री मानसून जल्द नहीं आया तो इससे फसल को अधिक नुकसान हो सकता है।
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पिछले डेढ़ दशक में जिले में अनार ने अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। अनार उत्पादक अर्जन महंत, सुनू राम, अशोक, ज्ञान ठाकुर, दुनी चंद, चमन ने बताया कि इस साल सूखे जैसे हालात की वजह से फसल को नुकसान हो रहा है। इसका असर अनार के आकार और गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। लंबे समय से पर्याप्त बारिश न होने से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल मंडियों में अनार 130 से 150 रुपये प्रति किलो बिका था। उधर, बागवानी विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. बीएम चौहान ने बताया कि बागवानों को अनार की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विभाग प्रयासरत है, लेकिन इस बार सूखे का प्रभाव फल के विकास और गुणवत्ता पर पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है, वहां पर बागवान सिंचाई करें।
विभिन्न किस्मों का हो रहा उत्पादन
जिला कुल्लू में विभिन्न किस्मों का अनार पैदा हो रहा है। इसमें कंधारी, काबुली, गणेश, सिंधुरी और कंधारी बीज रहित, मृदुला बीज रहित शामिल हैं। अनार में कई पोषक तत्व भी विद्यमान हैं। इसके सेवन से कई बीमारियां से निजात मिलती है।