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Kullu News: मुखौटे और शलुई घास पहनकर नाचे लोग
Mon, 15 Jan 2024 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 15 Jan 2024 11:17 PM IST
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बंजार (कुल्लू)। पौष माह के खत्म होते ही जिले में फिर से देवी-देवताओं के सम्मान में मेलों का आयोजन शुरू हो गया है। बंजार घाटी के साथ लगते मंडी जिले के सराज में फागली उत्सव मनाया जा रहा है।
उपमंडल बंजार के थाटीबीड़ में भी मकर संक्रांति की रात से फागली पर्व का आगाज हुआ। देवता बासुकी नाग और करथा नाग के सम्मान में मनाए गए फागली उत्सव में सोमवार को वाद्ययंत्रों की थाप पर विष्णु स्वरूप माने जाने वाले मंडियाले नाचते हुए थाटीबीड़ में एक विशेष स्थान पर पहुंचे।
देवता के साथ नाचते हुए मंडियाले अश्लील गालियां देकर क्षेत्र से बुरी आत्माओं को भगाते हैं। लोग मुंह में मुखौटे तथा शलुई नामक घास को पहनकर नृत्य करते हैं। दो दिनों तक मनाए गए फागली पर्व को देखने के लिए दूर-दूर लोग पहुंचे। इस मौके पर शाम को बीठ परंपरा को निभाया गया जो फागली पर्व का सबसे आकर्षण का केंद्र रहता है।
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नरगिस के फूलों से बने बीठ को पकड़ने के लिए लोगों में खूब जद्दोजहद हुई। आखिर में कटौला गांव के दुनी चंद ने नरसिग के फूल को पकड़ा है। देर शाम तक कुल्लवी नाटी का दौर चलता रहा। मान्यता है कि जिसने बीठ को पकड़ा, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है।
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उपमंडल बंजार के थाटीबीड़ में भी मकर संक्रांति की रात से फागली पर्व का आगाज हुआ। देवता बासुकी नाग और करथा नाग के सम्मान में मनाए गए फागली उत्सव में सोमवार को वाद्ययंत्रों की थाप पर विष्णु स्वरूप माने जाने वाले मंडियाले नाचते हुए थाटीबीड़ में एक विशेष स्थान पर पहुंचे।
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देवता के साथ नाचते हुए मंडियाले अश्लील गालियां देकर क्षेत्र से बुरी आत्माओं को भगाते हैं। लोग मुंह में मुखौटे तथा शलुई नामक घास को पहनकर नृत्य करते हैं। दो दिनों तक मनाए गए फागली पर्व को देखने के लिए दूर-दूर लोग पहुंचे। इस मौके पर शाम को बीठ परंपरा को निभाया गया जो फागली पर्व का सबसे आकर्षण का केंद्र रहता है।
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नरगिस के फूलों से बने बीठ को पकड़ने के लिए लोगों में खूब जद्दोजहद हुई। आखिर में कटौला गांव के दुनी चंद ने नरसिग के फूल को पकड़ा है। देर शाम तक कुल्लवी नाटी का दौर चलता रहा। मान्यता है कि जिसने बीठ को पकड़ा, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है।