{"_id":"6649d6a62208d3cda405472e","slug":"patriotism-is-in-guerrillas-dna-pritam-kullu-news-c-89-1-klu1001-122990-2024-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरिल्ला के डीएनए में है देशभक्ति : प्रीतम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरिल्ला के डीएनए में है देशभक्ति : प्रीतम
विज्ञापन
कहा, सरकार की नाकामी न होती को सबके पास होता रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। एसएसबी गुरिल्ला के डीएनए में देशभक्ति है। गुरिल्लाओं ने जो प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उससे वे आधुनिक हथियार चला सकते हैं। विडंबना है कि गुरिल्ला अपने हक के लिए न्यायालय में न्याय मांग रहा है। यह बात अखिल भारतीय एसएसबी गुरिल्ला संगठन के चेयरमैन प्रीतम सिंह ठाकुर ने रविवार को कुल्लू में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नाकामी नहीं रही हाेती तो सभी गुरिल्लाओं के पास रोजगार होता। गुरिल्ला वर्ष 2009 से आंदोलन कर रहे हैं। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आगामी 9 जुलाई को मामले की सुनवाई होगी। गुरिल्लाओं के लिए करो या मरो वाली स्थिति जल्द आने वाली है।
वर्ष 2001 से पहले एसएसबी में पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिलता था। बाद में इसे भी साजिश के तहत बंद किया गया। वर्तमान में 1000 के पीछे महज 30 युवाओं को रोजगार मिल रहा है। गुरिल्लाओं के हक की लड़ाई को आगे जारी रखा जाएगा। इस दौरान एसएसबी गुरिल्ला संगठन के जिला अध्यक्ष प्रेम राणा, अनूप राम, दीपलता शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। एसएसबी गुरिल्ला के डीएनए में देशभक्ति है। गुरिल्लाओं ने जो प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उससे वे आधुनिक हथियार चला सकते हैं। विडंबना है कि गुरिल्ला अपने हक के लिए न्यायालय में न्याय मांग रहा है। यह बात अखिल भारतीय एसएसबी गुरिल्ला संगठन के चेयरमैन प्रीतम सिंह ठाकुर ने रविवार को कुल्लू में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नाकामी नहीं रही हाेती तो सभी गुरिल्लाओं के पास रोजगार होता। गुरिल्ला वर्ष 2009 से आंदोलन कर रहे हैं। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आगामी 9 जुलाई को मामले की सुनवाई होगी। गुरिल्लाओं के लिए करो या मरो वाली स्थिति जल्द आने वाली है।
विज्ञापन
वर्ष 2001 से पहले एसएसबी में पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिलता था। बाद में इसे भी साजिश के तहत बंद किया गया। वर्तमान में 1000 के पीछे महज 30 युवाओं को रोजगार मिल रहा है। गुरिल्लाओं के हक की लड़ाई को आगे जारी रखा जाएगा। इस दौरान एसएसबी गुरिल्ला संगठन के जिला अध्यक्ष प्रेम राणा, अनूप राम, दीपलता शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन