फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu News ›   Not a patient, but a life-giving body buried in dust and rubbish, carrying the pain of the system.

Kullu News: मरीज नहीं, सिस्टम का दर्द ढो रही धूल-कबाड़ में दबी जीवनदायिनी

Fri, 21 Nov 2025 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Fri, 21 Nov 2025 11:04 PM IST
विज्ञापन
Not a patient, but a life-giving body buried in dust and rubbish, carrying the pain of the system.
कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में खस्ताहल में खड़ी एबुलेंस।-संवाद
कुल्लू अस्पताल की पार्किंग में खड़ी हैं खटारा एंबुलेंस, तारों से बंधे बंपर, सायरन भी टूटे
विज्ञापन

किसी में भरा पड़ा है कबाड़, मरम्मत के इंतजार में धूल फांक रही हैं अधिकतर एंबुलेंस

राजीव नैय्यर
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की पार्किंग इन दिनों किसी अस्पताल का हिस्सा नहीं, बल्कि कबाड़खाना ज्यादा लगती है। एंबुलेंस के सायरन ऐसे खामोश हैं जैसे किसी ने उनकी आवाज छीन ली हो, बंपर तारों के सहारे किसी तरह टंगे हैं।
जो एंबुलेंस जिंदगी बचाने के लिए निकलती थीं, वे अब खुद मरम्मत के इंतजार में धूल फांक रही हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीजों से पहले आपातकालीन वाहन ही अपना उपचार मांग रहे हैं।
विज्ञापन

मरीजों की नब्ज टटोल कर उपचार की सुविधा देने वाला स्वास्थ्य विभाग स्वयं बीमार चल रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा खटारा हो गई हैं। किसी एंबुलेंस के सायरन टूटे हैं तो किसी में कबाड़ भरा पड़ा है। कई एंबुलेंस के बंपर तारों से बांधकर चलाया जा रहा है। इंडिकेटर और लाइटें भी टूटी हैं। अस्पताल की पार्किंग में पार्क अधिकतर एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। पार्किंग में तीन जगह एंबुलेंस पार्क की गई हैं। ट्राॅमा सेंटर की सीढि़यों के पास जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की 102 एंबुलेंस खड़ी हैं। इन एंबुलेंस के सायरन मरहम-पट्टी से चल रहे हैं। पांच में से चार एंबुलेंस के सायरन टूटे हैं। साथ खड़ी 108 एंबुलेंस का भी यही हाल है। किसी की लाइटें टूटी हैं तो किसी का बंपर तारों से बांधा है। ऑक्सीजन प्लांट के पास पार्क एंबुलेंस पर धूल जमी है। ऐसा लगता है कि यह कई महीनों से नहीं दौड़ी है। डॉक्टरों की पार्किंग में खड़ी एंबुलेंस में स्वास्थ्य उपकरण नहीं, बल्कि कबाड़ भरा है। शहर में ही जब 102 और 108 एंबुलेंस जुगाड़ से चल रही हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में कैसे सेवाएं मिल रहीं होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
102 और 108 एंबुलेंस की मरम्मत का जिम्मा कंपनी का ही है। स्वास्थ्य विभाग का नोडल अधिकारी एंबुलेंस की जांच करता है। नोडल अधिकारी से रिपोर्ट ली जाएगी। इसके अलावा एंबुलेंस का औचक निरीक्षण भी किया जाएगा। खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. रणजीत ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
--
यह है 102 एंबुलेंस सेवा
102 एंबुलेंस सेवा जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत आती है। यह सेवा गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और उनकी माताओं के लिए है। यह सेवा मरीज को प्राथमिक उपचार देती है और उसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी अस्पताल में पहुंचाती है। 102 एंबुलेंस सेवा गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए आवास से स्वास्थ्य संस्थान और प्रसव के बाद घर वापसी करवाती है।

--
क्या है 108 एंबुलेंस सेवा
108 एंबुलेंस सेवा एक निशुल्क आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा है जो 24 घंटे चिकित्सा, पुलिस और अग्निशमन जैसी आपात स्थितियों के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया प्रदान करती है। यह सामान्य चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए है। हर क्षेत्रीय अस्पताल में 108 एंबुलेंस की सेवा है। इससे मरीज को आपात स्थिति में उपचार के लिए लाने की व्यवस्था रहती है।
--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed