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Kullu News: न खतरा बने पेट कटे, न ही नदी में उतरने से रुके सैलानी
Sat, 31 May 2025 10:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 31 May 2025 10:47 PM IST
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घटनाओं से कोई नहीं ले रहा सबक, हर बार अनदेखी पड़ रही भारी
30 मार्च को मणिकर्ण में पेड़ गिरने से हुई थी छह पर्यटकों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बड़ा हादसा होने के बाद हर बार बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। बड़े-बड़े फैसले लिए जाते हैं। कार्रवाई भी शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ दिन बीतने के साथ यह मुहिम भी ठंडी हो जाती है।
अभी मणिकर्ण घाटी में पेड़ गिरने से छह की मौत के मामले को दो महीने भी नहीं बीते थे कि अब सूमारोपा की पार्वती नदी में चीड़ का पेड़ गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मणिकर्ण में 30 मार्च को हुए हादसे के बाद प्रशासन और वन विभाग ने जान के लिए खतरा बने पेड़ों को चिह्नित कर काटने का काम शुरू कर दिया था, लेकिन यह कब बंद हो गया, इसका कोई पता नहीं चला। शनिवार को मणिकर्ण घाटी के सुमारोपा में नदी के किनारे पेड़ गिरा है। नदी के किनारे मौज-मस्ती करने उतरीं दो पर्यटक महिलाएं इसकी चपेट में आ गईं। ऐसे में यह हादसा प्रशासन के उन दोनों फरमानों की पोल खोल रहा है, जिसमें सूखे और खतरा बने पेड़ों को काटने का दावा किया गया था। साथ ही नदी में उतरने वाले पर्यटकों पर पाबंदी लगाने की बात कही गई थी।
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हादसे के समय काफी संख्या में मौजूद थे सैलानी
जानकारों की मानें तो प्रशासन के पर्यटकों को नदी-नालों में जाने से रोकने के आदेश धरातल पर उतारते तो दोनों पर्यटक महिलाएं हादसे का शिकार नहीं होतीं। हादसे के बाद पर्यटन और वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के लोगों की मानें तो पर्यटक अगर नदी में नहीं उतरते तो सुमारोपा में पेड़ की चपेट में महिला पर्यटक नहीं आती। हादसे के दौरान यहां काफी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। ऐसे में यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
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30 मार्च को मणिकर्ण में पेड़ गिरने से हुई थी छह पर्यटकों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बड़ा हादसा होने के बाद हर बार बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। बड़े-बड़े फैसले लिए जाते हैं। कार्रवाई भी शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ दिन बीतने के साथ यह मुहिम भी ठंडी हो जाती है।
अभी मणिकर्ण घाटी में पेड़ गिरने से छह की मौत के मामले को दो महीने भी नहीं बीते थे कि अब सूमारोपा की पार्वती नदी में चीड़ का पेड़ गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मणिकर्ण में 30 मार्च को हुए हादसे के बाद प्रशासन और वन विभाग ने जान के लिए खतरा बने पेड़ों को चिह्नित कर काटने का काम शुरू कर दिया था, लेकिन यह कब बंद हो गया, इसका कोई पता नहीं चला। शनिवार को मणिकर्ण घाटी के सुमारोपा में नदी के किनारे पेड़ गिरा है। नदी के किनारे मौज-मस्ती करने उतरीं दो पर्यटक महिलाएं इसकी चपेट में आ गईं। ऐसे में यह हादसा प्रशासन के उन दोनों फरमानों की पोल खोल रहा है, जिसमें सूखे और खतरा बने पेड़ों को काटने का दावा किया गया था। साथ ही नदी में उतरने वाले पर्यटकों पर पाबंदी लगाने की बात कही गई थी।
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हादसे के समय काफी संख्या में मौजूद थे सैलानी
जानकारों की मानें तो प्रशासन के पर्यटकों को नदी-नालों में जाने से रोकने के आदेश धरातल पर उतारते तो दोनों पर्यटक महिलाएं हादसे का शिकार नहीं होतीं। हादसे के बाद पर्यटन और वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के लोगों की मानें तो पर्यटक अगर नदी में नहीं उतरते तो सुमारोपा में पेड़ की चपेट में महिला पर्यटक नहीं आती। हादसे के दौरान यहां काफी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। ऐसे में यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
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