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Kullu News: कागजों में 51, हकीकत में 36 से 40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा दूध
Fri, 09 Jan 2026 10:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 09 Jan 2026 10:35 PM IST
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कुल्लू की रघुपुर घाटी के पशुपालकों को हर महीने उठाना पड़ रहा हजारों का नुकसान
पशुपालकों के लिए केवल कागजी दावा साबित हो रही दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी
उचित दाम न मिलने से पशुपालकों में रोष, बोले- सैकड़ों परिवारों की जुटी है रोजी-रोटी
रोशन ठाकुर
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी रघुपुर घाटी के पशुपालकों के लिए केवल कागजी दावा साबित हो रही है।
प्रदेश सरकार ने श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गाय के दूध का मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर तय किया है लेकिन घाटी में दुग्ध उत्पादकों को मात्र 36 से 40 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहे हैं।
उचित दाम न मिलने से सैकड़ों पशुपालकों को हर महीने हजारों रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में जो पशुपालक प्रतिदिन 5 लीटर दूध बेचता है, उसे कम रेट के कारण महीने में करीब 2,250 रुपये का नुकसान हो रहा है। 10 लीटर दूध प्रतिदिन देने वाले को 4,500 रुपये और 15 लीटर दूध प्रतिदिन सप्लाई करने वाले पशुपालक को 6,750 रुपये तक का मासिक घाटा उठाना पड़ रहा है।
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एक तरफ चारे और खल के दाम आसमान छू रहे हैं, दूसरी तरफ प्रति लीटर 15 रुपये तक कम मिलने से पशुपालकों में सरकार और स्थानीय प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। गौरतलब है कि पिछले तीन-चार वर्षों से रघुपुर घाटी दूध उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से उभरी है। यहां से प्रतिदिन लगभग 1,000 लीटर दूध की सप्लाई हो रही है जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
घाटी के धर्मा देवी, यशोदा देवी, गीता देवी, रीना ठाकुर, सुंदर सिंह, टीकम राम, किशोरी लाल, विजय कुमारी शर्मा, कमल ठाकुर, रोशन शर्मा, प्रेम लाल और दीपक कुमार जैसे उत्पादकों का कहना है कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में पूरा रेट मिल रहा है लेकिन रघुपुर के उत्पादकों के साथ भेदभाव हो रहा है।
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फेडरेशन की ओर से गाय का दूध 51 रुपये और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से ही खरीदा जा रहा है। स्थानीय सचिव स्तर पर मनमानी की जा रही है। इस वजह से किसानों तक पूरा पैसा नहीं पहुंच रहा है। जल्द ही फेडरेशन जागरूकता अभियान चलाएगी ताकि उत्पादक स्वयं अपने दूध की डिग्री माप सकें। -बीएस ठाकुर, अध्यक्ष मिल्क फेडरेशन हिमाचल प्रदेश
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पशुपालकों के लिए केवल कागजी दावा साबित हो रही दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी
उचित दाम न मिलने से पशुपालकों में रोष, बोले- सैकड़ों परिवारों की जुटी है रोजी-रोटी
रोशन ठाकुर
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी रघुपुर घाटी के पशुपालकों के लिए केवल कागजी दावा साबित हो रही है।
प्रदेश सरकार ने श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गाय के दूध का मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर तय किया है लेकिन घाटी में दुग्ध उत्पादकों को मात्र 36 से 40 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहे हैं।
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उचित दाम न मिलने से सैकड़ों पशुपालकों को हर महीने हजारों रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में जो पशुपालक प्रतिदिन 5 लीटर दूध बेचता है, उसे कम रेट के कारण महीने में करीब 2,250 रुपये का नुकसान हो रहा है। 10 लीटर दूध प्रतिदिन देने वाले को 4,500 रुपये और 15 लीटर दूध प्रतिदिन सप्लाई करने वाले पशुपालक को 6,750 रुपये तक का मासिक घाटा उठाना पड़ रहा है।
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एक तरफ चारे और खल के दाम आसमान छू रहे हैं, दूसरी तरफ प्रति लीटर 15 रुपये तक कम मिलने से पशुपालकों में सरकार और स्थानीय प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। गौरतलब है कि पिछले तीन-चार वर्षों से रघुपुर घाटी दूध उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से उभरी है। यहां से प्रतिदिन लगभग 1,000 लीटर दूध की सप्लाई हो रही है जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
घाटी के धर्मा देवी, यशोदा देवी, गीता देवी, रीना ठाकुर, सुंदर सिंह, टीकम राम, किशोरी लाल, विजय कुमारी शर्मा, कमल ठाकुर, रोशन शर्मा, प्रेम लाल और दीपक कुमार जैसे उत्पादकों का कहना है कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में पूरा रेट मिल रहा है लेकिन रघुपुर के उत्पादकों के साथ भेदभाव हो रहा है।
फेडरेशन की ओर से गाय का दूध 51 रुपये और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से ही खरीदा जा रहा है। स्थानीय सचिव स्तर पर मनमानी की जा रही है। इस वजह से किसानों तक पूरा पैसा नहीं पहुंच रहा है। जल्द ही फेडरेशन जागरूकता अभियान चलाएगी ताकि उत्पादक स्वयं अपने दूध की डिग्री माप सकें। -बीएस ठाकुर, अध्यक्ष मिल्क फेडरेशन हिमाचल प्रदेश