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Kullu News: वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों से गूंज उठा मलाणा गांव
Fri, 20 Feb 2026 10:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 20 Feb 2026 10:13 PM IST
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कुल्लू के अतिदुर्गम गांव मलाणा में फागली उत्सव के दौरान ग्रामीण।-संवाद
देवता जमलू के सम्मान में आयोजित फागली में दिखी देव संस्कृति की झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। विश्व के सबसे प्राचीन लोकतंत्र कहे जाने वाले मलाणा गांव में शुक्रवार को देवता जमलू के सम्मान में फागली उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया। फागली में देव परंपराओं का निर्वहन हुआ। वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों के बीच मलाणा गांव गूंज उठा। देवता जमलू के दरबार में शीश नवाकर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
बर्फ से ढकीं पहाड़ियों के बीच मलाणा गांव में वीरवार देर शाम को फागली का आगाज हो गया था। गांव से वीरवार शाम को मशालों को निकाला गया था। इसके बाद परंपरा निभाई गई। शुक्रवार को देवता जमलू ऋषि के पुजारी और कारकूनों ने देव परंपरा को निभाया। गौर रहे कि मलाणा की संस्कृति और परंपराएं ही इसे सबसे अलग बनाते हैं। देव परंपराओं और संस्कृति को मलाणा के लोगों ने आज भी संजोए रखा हुआ है। स्थानीय निवासी बाबू राम ने कहा कि बर्फ से ढकीं पहाड़ियों के बीच जब ढोल की गूंज हवा में घुलती है तो सदियों पुरानी परंपराएं फिर से जीवित हो उठती हैं। मलाणा में हर कदम में संस्कृति बसती है। यहां के लोग अपनी संस्कृति पर गर्व करते हैं। फागली में देव संस्कृति की झलक देखने को मिली।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। विश्व के सबसे प्राचीन लोकतंत्र कहे जाने वाले मलाणा गांव में शुक्रवार को देवता जमलू के सम्मान में फागली उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया। फागली में देव परंपराओं का निर्वहन हुआ। वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों के बीच मलाणा गांव गूंज उठा। देवता जमलू के दरबार में शीश नवाकर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
बर्फ से ढकीं पहाड़ियों के बीच मलाणा गांव में वीरवार देर शाम को फागली का आगाज हो गया था। गांव से वीरवार शाम को मशालों को निकाला गया था। इसके बाद परंपरा निभाई गई। शुक्रवार को देवता जमलू ऋषि के पुजारी और कारकूनों ने देव परंपरा को निभाया। गौर रहे कि मलाणा की संस्कृति और परंपराएं ही इसे सबसे अलग बनाते हैं। देव परंपराओं और संस्कृति को मलाणा के लोगों ने आज भी संजोए रखा हुआ है। स्थानीय निवासी बाबू राम ने कहा कि बर्फ से ढकीं पहाड़ियों के बीच जब ढोल की गूंज हवा में घुलती है तो सदियों पुरानी परंपराएं फिर से जीवित हो उठती हैं। मलाणा में हर कदम में संस्कृति बसती है। यहां के लोग अपनी संस्कृति पर गर्व करते हैं। फागली में देव संस्कृति की झलक देखने को मिली।
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