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मणिमहेश यात्रा: 16,800 फीट ऊंची कुगती जोत पर लग रहे महादेव के जयकारे

Mon, 08 Aug 2022 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, उदयपुर (लाहौल- स्पीति)
दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, उदयपुर (लाहौल- स्पीति) Published by: शिमला ब्यूरो Updated Mon, 08 Aug 2022 11:31 PM IST
सार

समुद्रतल से 16,800 फीट ऊंची कुगती जोत को लांघ कर श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लि मणिमहेश पहुंच रहे हैं। इस रूट पर भक्त तीन दिन चलकर चौथे दिन मणिमहेश झील पहुंचते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को कई हिस्सों में खड़ी चढ़ाई और पथरीले रास्ते को पार करना पड़ रहा है। महिला श्रद्धालु अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए...डमरू वाले तू ही सहारा की जयकार लगाकर आगे बढ़ते हैं।

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Manimahesh Yatra: jaikare of Mahadev on 16,800 feet high Kugti holding
ऊंची कुगती जोत को लांघ रहे श्रद्धालु - फोटो : संवाद

विस्तार

व्यक्ति भक्ति में लीन हो तो उसके लिए कोई भी राह आसान लगती है। ऐसा ही इन दिनों महादेव के भक्तों का लाहौल के रापे (जोबरंग) गांव होते हुए मणिमहेश झील की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं में देखने को मिल रहा है।
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समुद्रतल से 16,800 फीट ऊंची कुगती जोत को लांघ कर श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लि मणिमहेश पहुंच रहे हैं। इस रूट पर भक्त तीन दिन चलकर चौथे दिन मणिमहेश झील पहुंचते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को कई हिस्सों में खड़ी चढ़ाई और पथरीले रास्ते को पार करना पड़ रहा है। महिला श्रद्धालु अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए...डमरू वाले तू ही सहारा की जयकार लगाकर आगे बढ़ते हैं।
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मान्यता है कि इस रूट से पदयात्रा कर भक्तों के मन की मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। रास्ते कठिन होने से अगर कोई भक्त रास्ता भूल जाए तो उसका वापस लौटना भी आसान नहीं है। लाहौल घाटी के जोबरंग जीरो प्वाइंट से मणिमहेश 64 किमी दूर है। इस रूट पर यात्रियों का पहला पड़ाव अलियास, दूसरा केलिंग मंदिर और तीसरा पड़ाव डढ़ी अलियास में रुकने के बाद चौथे दिन डल झील पहुंचा जा सकता है। इन दिनों पुरुष एवं महिला श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा पर जा रहे हैं। अमूमन यह रूट जून-जुलाई माह में चंबा के गद्दियों के लाहौल आने के बाद श्रद्धालुओं के लिए खुल जाता है।
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सितंबर के बाद कभी भी खराब मौसम के चलते बर्फबारी से यह बंद हो जाता है। बता दें कि त्रिलोकनाथ में मनाई जाने वाले पोरी मेले के समापन पर श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था हर वर्ष मणिमहेश झील की ओर निकलता है।

कुगती के रास्ते मणिमहेश का दर्शन कर लौटी महिला श्रद्धालु निर्मला मनेपा और पूनम ने बताया कि रूट काफी कठिन है। भक्ति के आगे उन्हें यह रास्ता कठिन नहीं लगा है। उपायुक्त लाहौल-स्पीति सुमित खिमटा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह मौसम का देखते हुए ही यात्रा करें।

Mahadev's cheers on 16,800 feet high kugti holding

 

 

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