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Kullu News: पारंपरिक परिधानों में लालड़ी ने लगाए चार चांद
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कुल्लू। ढालपुर के रथ मैदान में नजारा उस समय अलग हो गया, जब यहां का माहौल वाद्ययंत्रों से गूंज गया। लालड़ी नृत्य पर हर कोई झूम उठा। ढीली नाटी का स्वरूप माने जाने वाली लालड़ी नृत्य का यहां पर काफी अधिक संख्या में लोगों ने आनंद लिया।
खास बात यह रही कि लालड़ी के लिए रथ मैदान के बीच में आग जलाई गई थी, जिसके चारों ओर लालड़ी चलती रही। लालड़ी में महिलाओं, युवतियों और पुरुषों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। दशहरा के समापन आए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी लालड़ी के अवसर पर रथ मैदान में पहुंचे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे। लालड़ी के लिए यहां पर आयोजकों की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। लालड़ी का सिलसिला यहां देर रात तक चलता रहा।
इस संबंध में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ कुल्लू के अध्यक्ष अमर चंद ठाकुर ने कहा कि प्राचीन नृत्य लालड़ी काफी प्रसिद्ध है। लालड़ी नृत्य ढीली नाटी की तरह होता है, इसमें पारंपरिक गीत ही गाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी डीजे को अधिक तवज्जो दे रही है, जबकि इस तरह की संस्कृति को हमें संजोए रखने की जरूरत है। लालड़ी नृत्य में किसी तरह का शोर-शराबा भी नहीं होता है। संवाद
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खास बात यह रही कि लालड़ी के लिए रथ मैदान के बीच में आग जलाई गई थी, जिसके चारों ओर लालड़ी चलती रही। लालड़ी में महिलाओं, युवतियों और पुरुषों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। दशहरा के समापन आए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी लालड़ी के अवसर पर रथ मैदान में पहुंचे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे। लालड़ी के लिए यहां पर आयोजकों की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। लालड़ी का सिलसिला यहां देर रात तक चलता रहा।
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इस संबंध में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ कुल्लू के अध्यक्ष अमर चंद ठाकुर ने कहा कि प्राचीन नृत्य लालड़ी काफी प्रसिद्ध है। लालड़ी नृत्य ढीली नाटी की तरह होता है, इसमें पारंपरिक गीत ही गाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी डीजे को अधिक तवज्जो दे रही है, जबकि इस तरह की संस्कृति को हमें संजोए रखने की जरूरत है। लालड़ी नृत्य में किसी तरह का शोर-शराबा भी नहीं होता है। संवाद
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