{"_id":"683dd9a56605d8ffdb033052","slug":"kullus-eight-trekking-routes-have-become-earning-sons-kullu-news-c-89-1-klu1002-148920-2025-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: कमाऊ पूत बने कुल्लू के आठ ट्रैकिंग रूट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: कमाऊ पूत बने कुल्लू के आठ ट्रैकिंग रूट
Mon, 02 Jun 2025 10:34 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 02 Jun 2025 10:34 PM IST
विज्ञापन
भर रहे वन विभाग का खजाना, साल दर साल हो रही राजस्व में बढ़ोतरी
वन विभाग ने तीन सालों में टेंट पिचिंग से चार साल में जुटाए 60 लाख रुपये
लगातार बढ़ रही कमाई, तीन सालों में 25 हजार से बढ़कर 36 लाख पहुंचा राजस्व
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले के ट्रैकिंग रूट वन विभाग का खजाना भरने का काम कर रहे हैं। इन ट्रैकिंग रूटों से प्राप्त होने वाले राजस्व में साल दर साल इजाफा हो रहा है। वर्तमान में जिले में आठ ट्रैकिंग रूट ऐसे हैं, जो वन विभाग को टेंट पिचिंग से अच्छा खासा राजस्व दे रहे हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार तीन साल पहले टेंट पिचिंग से प्राप्त होने वाले राजस्व का आंकड़ा हजारों में था। वर्तमान में यह लाखों में पहुंच गया है। इससे विभाग के लिए ट्रैकिंग रूट कमाई का साधन बनने लगे हैं। बीते तीन सालों के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में सिर्फ दो ही ट्रैकिंग रूट में टेंट पिचिंग से सालाना 25000 रुपये का राजस्व मिला था। इसके बाद यह बढ़ता गया। यह 2023-24 में तीन ट्रैकिंग रूट से सालाना 22 लाख 87 हजार 190 रुपये तक जा पहुंचा। 2024-25 में 8 ट्रैकिंग रूट से वन विभाग ने टेंट पिचिंग के माध्यम से 36 लाख 68 हजार 800 का राजस्व कमाया। इसके चलते बीते तीन सालों में ही वन विभाग ने टेंट पिचिंग की अनुमति देकर 60 लाख का राजस्व जुटाया है।
--
टेंट लगाने की अनुमति देता है विभागवन विभाग ट्रैकिंग रूट में ट्रैकरों को टेंट लगाने की अनुमति देने की एवज में फीस लेता है। इसके चलते ट्रैकर जंगलों में टेंट लगाकर रात्रि ठहराव करते हैं। जिले के आठ ट्रैकिंग रूट में वन विभाग टेंट लगाने की अनुमति दे रहा है। टेंट लगाने की अनुमति देने के रूप में ट्रैकरों और कंपनी की ओर से मिलने वाली इस फीस से वन विभाग को सालाना लाखों रुपये मिल रहे हैं।
विज्ञापन
--
किस रूट से कितना राजस्व मिला
ट्रैकिंग रूट 2022-23 2023-24 2024-25
सोलह टंकी 21000-- -- -- -- - 213250
चंद्रखणी-नया टापरू-- -- -- - -- -- -- -- 148300
तिटगां-- -- -- - -- -- -- -- 90000
भृगु, हामटा, ब्यासकुंड-- -- -- - 2297290 3177000
रानी सुई 4000 4800 5800
काइसधार-- -- -- 3100 34550
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
कुल राजस्व वर्ष बार-- - 25000 2287190 3668800
--
विभाग को ट्रैकिंग रूट में टेंट पिचिंग के माध्यम से राजस्व मिल रहा है। यह साल दर साल बढ़ रहा है। ट्रैकिंग रूट को विकसित कर पर्यटकों को सुविधाएं देने की योजना है, जिससे पर्यटकों को सुविधाएं मिलें और विभाग को राजस्व भी मिल सके। - एंजल चौहान, वन मंडलाधिकारी, कुल्लू
--
विज्ञापन
वन विभाग ने तीन सालों में टेंट पिचिंग से चार साल में जुटाए 60 लाख रुपये
लगातार बढ़ रही कमाई, तीन सालों में 25 हजार से बढ़कर 36 लाख पहुंचा राजस्व
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले के ट्रैकिंग रूट वन विभाग का खजाना भरने का काम कर रहे हैं। इन ट्रैकिंग रूटों से प्राप्त होने वाले राजस्व में साल दर साल इजाफा हो रहा है। वर्तमान में जिले में आठ ट्रैकिंग रूट ऐसे हैं, जो वन विभाग को टेंट पिचिंग से अच्छा खासा राजस्व दे रहे हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार तीन साल पहले टेंट पिचिंग से प्राप्त होने वाले राजस्व का आंकड़ा हजारों में था। वर्तमान में यह लाखों में पहुंच गया है। इससे विभाग के लिए ट्रैकिंग रूट कमाई का साधन बनने लगे हैं। बीते तीन सालों के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में सिर्फ दो ही ट्रैकिंग रूट में टेंट पिचिंग से सालाना 25000 रुपये का राजस्व मिला था। इसके बाद यह बढ़ता गया। यह 2023-24 में तीन ट्रैकिंग रूट से सालाना 22 लाख 87 हजार 190 रुपये तक जा पहुंचा। 2024-25 में 8 ट्रैकिंग रूट से वन विभाग ने टेंट पिचिंग के माध्यम से 36 लाख 68 हजार 800 का राजस्व कमाया। इसके चलते बीते तीन सालों में ही वन विभाग ने टेंट पिचिंग की अनुमति देकर 60 लाख का राजस्व जुटाया है।
विज्ञापन
टेंट लगाने की अनुमति देता है विभागवन विभाग ट्रैकिंग रूट में ट्रैकरों को टेंट लगाने की अनुमति देने की एवज में फीस लेता है। इसके चलते ट्रैकर जंगलों में टेंट लगाकर रात्रि ठहराव करते हैं। जिले के आठ ट्रैकिंग रूट में वन विभाग टेंट लगाने की अनुमति दे रहा है। टेंट लगाने की अनुमति देने के रूप में ट्रैकरों और कंपनी की ओर से मिलने वाली इस फीस से वन विभाग को सालाना लाखों रुपये मिल रहे हैं।
विज्ञापन
किस रूट से कितना राजस्व मिला
ट्रैकिंग रूट 2022-23 2023-24 2024-25
सोलह टंकी 21000
चंद्रखणी-नया टापरू
तिटगां
भृगु, हामटा, ब्यासकुंड
रानी सुई 4000 4800 5800
काइसधार
कुल राजस्व वर्ष बार
विभाग को ट्रैकिंग रूट में टेंट पिचिंग के माध्यम से राजस्व मिल रहा है। यह साल दर साल बढ़ रहा है। ट्रैकिंग रूट को विकसित कर पर्यटकों को सुविधाएं देने की योजना है, जिससे पर्यटकों को सुविधाएं मिलें और विभाग को राजस्व भी मिल सके। - एंजल चौहान, वन मंडलाधिकारी, कुल्लू