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इस बार संक्षिप्त रूप में मनाया जाए कुल्लू दशहरा : महेश्वर
Sat, 20 Sep 2025 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 20 Sep 2025 10:58 PM IST
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पूर्व सांसद ने डीसी को लिखा पत्र, लाखों का खर्च करने से बचने के लिए कहा
कहा- दुकानें भी कम लगें, सिर्फ स्थानीय कलाकारों के ही करवाएं छोटे कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। इस बार आपदा को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का स्वरूप संक्षिप्त किया जाए। उत्सव में देव परंपरा का ही निर्वाहन किया जाए। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार एवं पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने इस संदर्भ में उपायुक्त को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि पत्र के माध्यम से प्रशासन और दशहरा कमेटी से आग्रह किया है कि इस बार जिला कुल्लू ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश आपदा से जूझ रहा है। कई लोगों की जान गई है और कइयों के घर और जमीन छिन गई है। ऐसे में उन परिवार के प्रति सहानुभूति बनाते हुए दशहरा उत्सव का स्वरूप संक्षिप्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी कलाकारों पर लाखों का खर्च करने से भी बचना जाना चाहिए। सिर्फ स्थानीय कलाकारों के ही छोटे कार्यक्रम किए जाएं और बाहरी राज्यों के कारोबारियों की दुकानें लगाना भी ठीक नहीं है। ऐसा करने से आपदा में परिवार का सदस्य गंवाने वाले परिवारों के प्रति भी सहानुभूति बनी रहेगी और लाखों का खर्च भी बचाया जा सकेगा जिससे प्रभावितों की मदद भी की जा सकती है।
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कहा- दुकानें भी कम लगें, सिर्फ स्थानीय कलाकारों के ही करवाएं छोटे कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। इस बार आपदा को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का स्वरूप संक्षिप्त किया जाए। उत्सव में देव परंपरा का ही निर्वाहन किया जाए। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार एवं पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने इस संदर्भ में उपायुक्त को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि पत्र के माध्यम से प्रशासन और दशहरा कमेटी से आग्रह किया है कि इस बार जिला कुल्लू ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश आपदा से जूझ रहा है। कई लोगों की जान गई है और कइयों के घर और जमीन छिन गई है। ऐसे में उन परिवार के प्रति सहानुभूति बनाते हुए दशहरा उत्सव का स्वरूप संक्षिप्त किया जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी कलाकारों पर लाखों का खर्च करने से भी बचना जाना चाहिए। सिर्फ स्थानीय कलाकारों के ही छोटे कार्यक्रम किए जाएं और बाहरी राज्यों के कारोबारियों की दुकानें लगाना भी ठीक नहीं है। ऐसा करने से आपदा में परिवार का सदस्य गंवाने वाले परिवारों के प्रति भी सहानुभूति बनी रहेगी और लाखों का खर्च भी बचाया जा सकेगा जिससे प्रभावितों की मदद भी की जा सकती है।
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