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Kullu News: चार साल बाद भी कुल्लू और भुंतर को नहीं मिली डंपिंग साइट
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कुल्लू के पिरड़ी में बंद कूड़ा संयंत्र।-संवाद
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। चार साल बाद भी नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर को डंपिंग साइट नहीं मिल पाई है। इसके पीछे जगह का उपलब्ध न होना बड़ी वजह है।
डंपिंग साइट के लिए जहां जगह चिह्नित की थी उसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। इसके चलते काम आगे नहीं बढ़ पाया। नगर परिषद ने शीशामाटी बिहाल, खराहल के तलोगी, नगर परिषद कुल्लू के तहत ही आने वाली दूसरी जगहों पर साइटें चिह्नित कीं। लेकिन स्थानीय लोगों ने डंपिंग साइट का विरोध किया। इसके चलते नगर परिषद को हाथ पीछे खींचने पड़े।
आलम यह है कि पिरडी डंपिंग साइट बंद होने के चार साल बाद नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर बिना डंपिंग साइट के है। नगर परिषद की ओर से लंकाबेकर में गीले कचरे से खाद बनाने के लिए लगाया गया कंपोस्टर चल रहा है।
कुल्लू और भुंतर का सारा कचरा पहले मनाली स्थित प्लांट में जाता था। अब नगर परिषद मनाली ने एक दिसंबर से कूड़ा लेने से मना कर दिया है। ऐसे में बिना साइट के नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर को मुश्किलें आ सकती हैं। लोगों की मानें तो अगर नगर परिषद इस मसले को लेकर गंभीर नहीं है।
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इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी बीआर नेगी ने कहा कि डंपिंग साइट की तलाश की जा रही है। नगर परिषद कुल्लू द्वारा जल्द ही नई साइट फाइनल कर दी जाएगी। इस मसले को लेकर उपायुक्त के साथ बैठक भी की जाएगी।
एक दिसंबर के बाद मनाली नहीं जाएगा कूड़ा
कुल्लू। बीते तीन साल से कुल्लू और भुंतर का कूड़ा-कचरा मनाली के रांगडी के कूड़ा संयंत्र भेजा जा रहा है। एक दिसंबर के बाद यहां कूड़ा नहीं जाएगा। ऐसे में नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इससे जिला प्रशासन भी चिंतित है।
एक दिन में निकलता है सात टन कूड़ा
कुल्लू और भुंतर शहर से रोजाना टनों के हिसाब से कूड़ा निकलता है। कुल्लू से प्रतिदिन पांच टन से अधिक कूड़ा निकलता है। जबकि भुंतर शहर से प्रतिदिन दो टन से अधिक कूड़ा निकलता है। नगर परिषद कुल्लू ने आईमा पंचायत के मॉडल को अपनाया है। इसके तहत घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लिया जाता है।
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डंपिंग साइट के लिए जहां जगह चिह्नित की थी उसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। इसके चलते काम आगे नहीं बढ़ पाया। नगर परिषद ने शीशामाटी बिहाल, खराहल के तलोगी, नगर परिषद कुल्लू के तहत ही आने वाली दूसरी जगहों पर साइटें चिह्नित कीं। लेकिन स्थानीय लोगों ने डंपिंग साइट का विरोध किया। इसके चलते नगर परिषद को हाथ पीछे खींचने पड़े।
आलम यह है कि पिरडी डंपिंग साइट बंद होने के चार साल बाद नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर बिना डंपिंग साइट के है। नगर परिषद की ओर से लंकाबेकर में गीले कचरे से खाद बनाने के लिए लगाया गया कंपोस्टर चल रहा है।
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कुल्लू और भुंतर का सारा कचरा पहले मनाली स्थित प्लांट में जाता था। अब नगर परिषद मनाली ने एक दिसंबर से कूड़ा लेने से मना कर दिया है। ऐसे में बिना साइट के नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर को मुश्किलें आ सकती हैं। लोगों की मानें तो अगर नगर परिषद इस मसले को लेकर गंभीर नहीं है।
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इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी बीआर नेगी ने कहा कि डंपिंग साइट की तलाश की जा रही है। नगर परिषद कुल्लू द्वारा जल्द ही नई साइट फाइनल कर दी जाएगी। इस मसले को लेकर उपायुक्त के साथ बैठक भी की जाएगी।
एक दिसंबर के बाद मनाली नहीं जाएगा कूड़ा
कुल्लू। बीते तीन साल से कुल्लू और भुंतर का कूड़ा-कचरा मनाली के रांगडी के कूड़ा संयंत्र भेजा जा रहा है। एक दिसंबर के बाद यहां कूड़ा नहीं जाएगा। ऐसे में नगर परिषद कुल्लू और नगर पंचायत भुंतर की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इससे जिला प्रशासन भी चिंतित है।
एक दिन में निकलता है सात टन कूड़ा
कुल्लू और भुंतर शहर से रोजाना टनों के हिसाब से कूड़ा निकलता है। कुल्लू से प्रतिदिन पांच टन से अधिक कूड़ा निकलता है। जबकि भुंतर शहर से प्रतिदिन दो टन से अधिक कूड़ा निकलता है। नगर परिषद कुल्लू ने आईमा पंचायत के मॉडल को अपनाया है। इसके तहत घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लिया जाता है।