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Kullu News: पूईद में वाद्ययंत्रों की थाप पर डाली कुल्लवी नाटी
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खराहल (कुल्लू)। अधिष्ठाती माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी के सम्मान में खराहल घाटी के गांव पूईद में मेला मनाया गया। वीरवार को ढोल-नगाड़ों की स्वरलहरियों से पूईद गांव गूंज उठा। माता जगन्नाथी के दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। माता के समक्ष शीश नवाकर श्रद्धालुओं और हारियानों ने आशीर्वाद लियास। पूईद में दिनभर खूब चहल-पहल बनी रही।
वीरवार शाम करीब 4:00 बजे माता के कारकून मंदिर के पास एकत्रित हुए। इसके बाद कारकूनों ने वाद्ययंत्रों की थाप पर कुल्लवी नाटी डाली। कुल्लवी नाटी ने खूब समां बांधा। सूर्यास्त होने के बाद माता जगन्नाथी ढोल-नगाड़े, नरसिंगों की स्वरलहरियों के बीच मंदिर से बाहर निकलीं। उसके बाद माता ने देव परंपरा के साथ मंदिर की परिक्रमा शुरू की। माता मंदिर परिसर स्थित सौह पहुंची।
सौह में देव नृत्य और देवताओं के गूरों ने भी माता के साथ नृत्य किया। देव परंपरा के निर्वहन के बाद माता अपने मंदिर लौटीं, जबकि कुल्लवी नाटी का सिलसिला जारी रहा। माता जगन्नाथी के कारदार चमन ठाकुर, पूईद पंचायत के पूर्व प्रधान एवं पुजारी उत्तम शर्मा, चांद किशोर शर्मा, देवलू पूर्ण चंद, रूप चंद, अमर चंद, अशोक ठाकुर आदि ने कहा कि पूईद में 15 अप्रैल को जागरण के साथ मेले की शुरुआत हुई थी। 16 अप्रैल को पूईद में जेठी जाच मनाई गई। 17 अप्रैल को विश्राम हुआ। वीरवार को माता जगन्नाथी ने देव परंपराओं का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार दोपहर दो बजे से नाटी डाली जाएगी। इसमें सभी ग्रामीण ढोल-नगाड़ाें की थाप पर थिरकेंगे।
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वीरवार शाम करीब 4:00 बजे माता के कारकून मंदिर के पास एकत्रित हुए। इसके बाद कारकूनों ने वाद्ययंत्रों की थाप पर कुल्लवी नाटी डाली। कुल्लवी नाटी ने खूब समां बांधा। सूर्यास्त होने के बाद माता जगन्नाथी ढोल-नगाड़े, नरसिंगों की स्वरलहरियों के बीच मंदिर से बाहर निकलीं। उसके बाद माता ने देव परंपरा के साथ मंदिर की परिक्रमा शुरू की। माता मंदिर परिसर स्थित सौह पहुंची।
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सौह में देव नृत्य और देवताओं के गूरों ने भी माता के साथ नृत्य किया। देव परंपरा के निर्वहन के बाद माता अपने मंदिर लौटीं, जबकि कुल्लवी नाटी का सिलसिला जारी रहा। माता जगन्नाथी के कारदार चमन ठाकुर, पूईद पंचायत के पूर्व प्रधान एवं पुजारी उत्तम शर्मा, चांद किशोर शर्मा, देवलू पूर्ण चंद, रूप चंद, अमर चंद, अशोक ठाकुर आदि ने कहा कि पूईद में 15 अप्रैल को जागरण के साथ मेले की शुरुआत हुई थी। 16 अप्रैल को पूईद में जेठी जाच मनाई गई। 17 अप्रैल को विश्राम हुआ। वीरवार को माता जगन्नाथी ने देव परंपराओं का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार दोपहर दो बजे से नाटी डाली जाएगी। इसमें सभी ग्रामीण ढोल-नगाड़ाें की थाप पर थिरकेंगे।
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