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Kullu News: तीन वर्षों में जिया गांव के वजूद को बचाने के लिए नहीं बना कोई प्लान
Thu, 19 Feb 2026 06:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 19 Feb 2026 06:06 AM IST
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कुल्लू। धार्मिक तीर्थ स्थल जिया के साथ गांव को बचाने के लिए तीन वर्षों से कोई भी योजना नहीं बन पाई है। लोगों का कहना है कि जिया गांव और संगम स्थल 2023 की बाढ़ से लेकर लगातार खतरे में पड़ गया है। प्रशासन की ओर से इसे बचाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस कारण लोग अभी भी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार जिया को खतरे में पड़ता देख तीन से चार बार उपायुक्त कुल्लू से मुलाकात कर चुके हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मौके पर उसके विपरीत कार्य किया जा रहा है। जिया गांव के ठीक सामने सब्जी मंडी के पास जो सुरक्षा दीवार लगाई जा रही है, उससे आने वाले समय में नदी का बहाव जिया गांव की तरफ मूड़ जाएगा और गांव के वजूद के साथ साथ संगम स्थल भी खतरे में पड़ेगा।
तटीकरण के नाम पर रेत-बजरी का कारोबार
स्थानीय लोगों ने हैरानी जताई है कि नदी के तटीकरण के नाम पर यहां बड़ी मात्रा में बीच नदी में मिट्टी के ढेर लगा रखे हैं और सुरक्षा दीवार भी बीच में दी जा रही है। शाम होते ही यहां ट्रैक्टर और टिपर, डंपर से लगातार रेत, बजरी और पत्थर निकालने का काम चल रहा है। यहां कहां जा रहा है, यह जांच का विषय है।
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वर्ष 2023 में आई बाढ़ से मेरा घर क्षतिग्रस्त हुआ है जिसमें करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है। उसके बाद 2025 की बाढ़ में 25 लाख का नुकसान हुआ है, जिसकी जिंदगी भर भरपाई नहीं हो पाएगी। अभी भी सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसको लेकर जिया के लोग खौफ के साये में जी रहे हैं।
-पवन शर्मा, प्रभावित
प्रशासन से उम्मीद थी कि जिया गांव की सुरक्षा के लिए योजना बनाई जाएगी लेकिन तीन साल बीत गए हैं। यहां के लिए योजना को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। अब आलम यह है कि क्षेत्र में बरसात के दिनों में लोग डर के माहौल में होते हैं।
-राजेंद्र शर्मा, स्थानीय निवासी
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स्थानीय लोगों के अनुसार जिया को खतरे में पड़ता देख तीन से चार बार उपायुक्त कुल्लू से मुलाकात कर चुके हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मौके पर उसके विपरीत कार्य किया जा रहा है। जिया गांव के ठीक सामने सब्जी मंडी के पास जो सुरक्षा दीवार लगाई जा रही है, उससे आने वाले समय में नदी का बहाव जिया गांव की तरफ मूड़ जाएगा और गांव के वजूद के साथ साथ संगम स्थल भी खतरे में पड़ेगा।
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तटीकरण के नाम पर रेत-बजरी का कारोबार
स्थानीय लोगों ने हैरानी जताई है कि नदी के तटीकरण के नाम पर यहां बड़ी मात्रा में बीच नदी में मिट्टी के ढेर लगा रखे हैं और सुरक्षा दीवार भी बीच में दी जा रही है। शाम होते ही यहां ट्रैक्टर और टिपर, डंपर से लगातार रेत, बजरी और पत्थर निकालने का काम चल रहा है। यहां कहां जा रहा है, यह जांच का विषय है।
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वर्ष 2023 में आई बाढ़ से मेरा घर क्षतिग्रस्त हुआ है जिसमें करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है। उसके बाद 2025 की बाढ़ में 25 लाख का नुकसान हुआ है, जिसकी जिंदगी भर भरपाई नहीं हो पाएगी। अभी भी सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसको लेकर जिया के लोग खौफ के साये में जी रहे हैं।
-पवन शर्मा, प्रभावित
प्रशासन से उम्मीद थी कि जिया गांव की सुरक्षा के लिए योजना बनाई जाएगी लेकिन तीन साल बीत गए हैं। यहां के लिए योजना को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। अब आलम यह है कि क्षेत्र में बरसात के दिनों में लोग डर के माहौल में होते हैं।
-राजेंद्र शर्मा, स्थानीय निवासी