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Kullu News: मलबे में दबीं उम्मीदें, सात माह बाद भी नहीं भरे बालू के जख्म

Fri, 20 Feb 2026 10:17 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Fri, 20 Feb 2026 10:17 PM IST
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Hopes buried in the rubble, sand wounds haven't healed even after seven months.
ग्राउंड रिपोर्ट---भूस्खलन से स्कूल भवन और मकान को पहुंचा नुकसान। फाइल फोटो।
गांव में भूस्खलन से क्षतिग्रस्त मकान, गोशालाओं और सेब के पौधों का नहीं मिला मुआवजा
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अगस्त 2025 में गांव की पहाड़ी से हुए अचानक भूस्खलन होने से हुआ था भारी नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पांच अगस्त 2025 की वह सुबह बालू गांव के लोगों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं थीं। पहाड़ी से अचानक गिरे मलबे ने कुछ ही मिनटों में घर, गोशालाएं, सेब के बगीचे और प्राइमरी स्कूल को तबाह कर दिया था।
उससे भी बड़ा दर्द यह है कि सात माह बाद भी आपदा प्रभावितों को उनके नुकसान का पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। गांव में आज भी टूटे ढांचे और असुरक्षित पहाड़ी आने वाले खतरे की चेतावनी दे रहे हैं।
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भूस्खलन में प्राइमरी स्कूल बालू का नामोनिशान मिट गया था। एक मकान और दो गोशालाएं इसकी चपेट में आने से तहस-नहस हो गई थीं। दससे पांच भेड़ों और दो गाय की मौत हो गई थी। 40 से अधिक सेब के पौधे भी तबाह हो गए थे। सरकार के आदेश के बावजूद प्रभावितों को मकान, गोशाला और सेब के पौधों को हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। पांच भेड़ों और एक गाय की मौत का मुआवजा मिल गया है लेकिन अन्य नुकसान का एक भी पैसा नहीं मिला है। इससे प्रभावित लोगों और गांववासियों में रोष है।
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प्रभावित हीरा लाल, मोहर सिंह और झगड़ सिंह ने कहा कि पांच अगस्त की सुबह हुई तबाही ताउम्र याद रहेगी। भूस्खलन ने सेब बगीचे को सबसे पहले अपनी चपेट में लिया। इसके बाद दो गोशालाएं और एक कमान व प्राइमरी स्कूल भवन तहस-नहस हो गया। स्कूल के लिए भी अभी सरकार ने कुछ नहीं किया है। विद्यार्थी अभी भी माता बूढ़ी नागिन के सराय भवन में पढ़ रहे हैं। जिस जगह भूस्खलन हुआ है, वहां भी डंगे नहीं लगाए गए हैं।
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भूस्खलन को हुए सात माह का समय हो गया है। मात्र भेड़ों का मुआवजा मिला है जबकि गोशाला, एक गाय और सेब के 40 पौधों को पहुंचे नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। भूस्खलन वाली जगह पर डंगे भी नहीं लगे है। -हीरा लाल

--आपदा के दौरान रिहायशी मकान को नुकसान हुआ है। मकान का एक कमरा सामान सहित पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। - मोहर सिंह


--भूस्खलन गोशााला दब गई थी। भेड़ और गाय की मौत का मुआवजा मिल गया है लेकिन गोशाला का मुआवजा नहीं मिला है। हादसे के बाद से किसी ने कोई सुध नहीं ली है। जहां भूस्खलन हुआ है, वहां भी डंगे लगने चाहिए। -झगड़ सिंह

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