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Kullu News: देवता बालूनाग ने लक्ष्मण रेखा रस्म का किया निर्वहन

Fri, 26 Jul 2024 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 11:39 PM IST
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God Balunag performed the Lakshman Rekha ritual
बंजार के चैथर में देवता बालू नाग ने किया लक्ष्मण रेखा रस्म का निर्वहन करते हुए।
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार के चैथर गांव के गोहर में त्रेता युग की परंपरा का वर्तमान समय में भी बखूबी पालन किया जा रहा है। रामायण काल में खींची गई लक्ष्मण रेखा के स्मृति पर्व की रस्म का गोहर में निर्वहन किया गया। यह पुरातन एवं पुराण संगत रस्म का निर्वहन पांच गढ़ और दो रियासतों मंडी एवं कुल्लू के आराध्य देवता शेषावतार अनंत बालू नाग ने किया। बता देें त्रेता युग में भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास मिलने पर पंचबटी में देवता लक्ष्मण ने सीता माता की रक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींची, ताकि सीता माता पर कोई विपत्ति न आए। त्रेता युग से कलियुग तक इस परंपरा को शेषावतार देवता बालूनाग आज भी निभा रहे हैं।
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माता सीता के चरणों का प्रत्यक्ष प्रमाण वर्तमान समय में गोहर के दक्षिण में है। देवता के कारदार ख्याली राम शर्मा, पुजारी लीलाधर, जीवन शर्मा, मेहता बलवीर, पदम देव, महेंद, पुरुषोतम, जगत मेहता ने बताया कि देवता बालूनाग के रथ को चैथर गांव के खमयाडा नामक स्थान से गोहर लाया गया। देवता के प्रमुख हारियानों ने लक्ष्मण रेखा खींचने की प्रक्रिया शुरू की तथा भगवान राम को सीटी बजाकर माता सीता के हरण का वृतांत सुनाया। कहा कि देवता बालूनाग शेषनाग हैं और उन्हें भगवान राम का छोटा भाई लक्ष्मण भी कहा जाता है। इसलिए यह परंपरा देव रीति के अनुसार निभाई जाती है। संवाद
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