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Kullu News: केलांग में धूमधाम से मनाया गोची उत्सव
Wed, 05 Feb 2025 08:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 05 Feb 2025 08:55 AM IST
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गोची उत्सव पर केलांग में परंपराओं का निर्वहन करते ग्रामीण। -स्रोत: जागरूक पाठक
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिला मुख्यालय केलांग में मंगलवार को पुत्र जन्म से जुड़े पारंपरिक गोची उत्सव को धूमधाम से मनाया गया। उत्सव में लकड़ी की बड़ी थाली पर सत्तू और घी से शिवलिंग की आकृति बनाई गई।
लाहौल के प्यूकर गांव में जहां बेटी के जन्म पर भी गोची उत्सव मनाने की परंपरा है, वहीं गाहर घाटी के अन्य गांवों में पुत्र जन्म पर पूरे गांव को धाम परोसी जाती है। इस अवसर पर लोअर और अप्पर केलांग में भी उत्सव आयोजित किया गया। समारोह में मेहमानों को जौ से निर्मित पेय ‘छांग’ परोसी गई।
स्थानीय निवासी नोरबू तोलगपा, नोरबू और तेंजिन कारपा ने बताया कि उत्सव के दूसरे दिन शिवलिंग में नौ छिद्र कर उनमें मक्खन भरा गया, जिसके बाद भगवान शिव की पूजा की गई। मान्यता है कि पुत्र जन्म भगवान शिव का वरदान होता है, और यह पर्व शिव पुत्र कार्तिक को समर्पित रहता है।
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गोची उत्सव के तहत सत्तू से बने शिवलिंग को चार व्यक्तियों ने उठाकर देवस्थल पहुंचाया। गत वर्ष जिन घरों में पुत्र जन्म हुआ था, वहां की महिलाएं और ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में देवस्थल पहुंचे। इसके बाद लबदकपा ने धनुष पर बाण चढ़ाकर कुल देवता की पूजा की।
विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि गाहर घाटी में गोची उत्सव पुत्र जन्म की खुशी का विशेष उत्सव है, जबकि प्यूकर में बेटी के जन्म पर भी इसे मनाया जाना गर्व की बात है। उन्होंने गोची उत्सव के अवसर पर गाहर वेली के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
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लाहौल के प्यूकर गांव में जहां बेटी के जन्म पर भी गोची उत्सव मनाने की परंपरा है, वहीं गाहर घाटी के अन्य गांवों में पुत्र जन्म पर पूरे गांव को धाम परोसी जाती है। इस अवसर पर लोअर और अप्पर केलांग में भी उत्सव आयोजित किया गया। समारोह में मेहमानों को जौ से निर्मित पेय ‘छांग’ परोसी गई।
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स्थानीय निवासी नोरबू तोलगपा, नोरबू और तेंजिन कारपा ने बताया कि उत्सव के दूसरे दिन शिवलिंग में नौ छिद्र कर उनमें मक्खन भरा गया, जिसके बाद भगवान शिव की पूजा की गई। मान्यता है कि पुत्र जन्म भगवान शिव का वरदान होता है, और यह पर्व शिव पुत्र कार्तिक को समर्पित रहता है।
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गोची उत्सव के तहत सत्तू से बने शिवलिंग को चार व्यक्तियों ने उठाकर देवस्थल पहुंचाया। गत वर्ष जिन घरों में पुत्र जन्म हुआ था, वहां की महिलाएं और ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में देवस्थल पहुंचे। इसके बाद लबदकपा ने धनुष पर बाण चढ़ाकर कुल देवता की पूजा की।
विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि गाहर घाटी में गोची उत्सव पुत्र जन्म की खुशी का विशेष उत्सव है, जबकि प्यूकर में बेटी के जन्म पर भी इसे मनाया जाना गर्व की बात है। उन्होंने गोची उत्सव के अवसर पर गाहर वेली के लोगों को शुभकामनाएं दीं।