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Kullu News: मेघ न बरसने से खेत सूखे, जिले में रुकी गेहूं की बिजाई
Mon, 04 Nov 2024 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:13 PM IST
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खराहल घाटी के हलैणी गांव में मक्की की फसल निकालने के बाद खाली पड़ा खेत, बिना बारिश के घाटी में
कुल्लू। सूखे जैसे हालात के चलते कुल्लू जिले में करीब 13000 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल गेहूं की बिजाई रुक गई है। खेतों में नमी न होने के कारण किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर पाए हैं। हालांकि, कृषि प्रसार केंद्रों में बीज की खेप आ चुकी है।
कृषि विभाग के इन कृषि प्रसार केंद्रों से बीज लेने के बाद किसान बिजाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग एचपीडब्लयू 550 बीज किसानों को उपलब्ध करवा रहा है। किसान बीज तो खरीद रहे हैं, लेकिन सूखे जैसे हालात को देखकर बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। जिले में करीब 80 फीसदी किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं। करीब 2500 हेक्टेयर में ही सिंचित क्षेत्र है, जबकि अन्य में किसानों को बारिश के सहारे की खेती करनी पड़ती है। सितंबर और अक्तूबर में बारिश न होने से किसानों रबी फसल की चिंता सताने लगी है। इस बार गेहूं की बिजाई के लिए करीब एक महीना की देरी हुई है।
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फिलहाल बारिश न होना चिंता का विषय बना हुआ है। अगर 20 नवंबर तक बारिश होती है तो नुकसान की भरपाई हो जाएगी। अगर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक बारिश नहीं होती है तो इसका असर गेहूं की पैदावार और मात्रा पर पड़ेगा। - सुशील शर्मा, उप निदेशक, कृषि विभाग कुल्लू
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मक्की और राजमा की फसल को निकालने के बाद अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही खेत खाली कर दिए थे। 15 अक्तूबर के बाद गेहूं की बिजाई करनी थी। नवंबर का पहला सप्ताह शुरू हो गया है, अभी तक बादल नहीं बरसे हैं। ऐसे में पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।
- सुरेश शर्मा, निवासी बंदल, बंजार
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खराहल क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की सुविधा बेहद कम है। ऐसे में खेतों में अधिकतर किसान गेहूं की बिजाई करते हैं। अगर समय पर बारिश नहीं होती है तो इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ेगा। बारिश का न होना देव प्रकोप भी हो सकता है। देवताओं का भी सम्मान होना चाहिए।
- फतेह सिंह राणा, चतानी, खराहल
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खरीफ की फसल इस बार सूखे जैसे हालात के चलते प्रभावित हुई है। अगस्त में कम बारिश होने से दालों की पैदावार में 30 फीसदी तक इस बार कमी आई है। अब रबी फसल पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गेहूं की बिजाई के लिए किसानों को बारिश की जरूरत है।
- उमेश ठाकुर, निवासी मनसारी, उझी घाटी
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खेतों में नमी न के बराबर है। नमी न होने से किसान रबी फसल की बिजाई को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, किसान बारिश होने की उम्मीद को देखते हुए बीज भी खरीद रहे हैं। पिछले साल भी सर्दियों में कम बारिश हुई थी, अगर ऐसा ही हाल इस वर्ष भी हुआ तो फसलें प्रभावित होंगी।
- प्रीतम चंद, निवासी बनोगी, सैंज
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कृषि विभाग के इन कृषि प्रसार केंद्रों से बीज लेने के बाद किसान बिजाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग एचपीडब्लयू 550 बीज किसानों को उपलब्ध करवा रहा है। किसान बीज तो खरीद रहे हैं, लेकिन सूखे जैसे हालात को देखकर बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। जिले में करीब 80 फीसदी किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं। करीब 2500 हेक्टेयर में ही सिंचित क्षेत्र है, जबकि अन्य में किसानों को बारिश के सहारे की खेती करनी पड़ती है। सितंबर और अक्तूबर में बारिश न होने से किसानों रबी फसल की चिंता सताने लगी है। इस बार गेहूं की बिजाई के लिए करीब एक महीना की देरी हुई है।
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फिलहाल बारिश न होना चिंता का विषय बना हुआ है। अगर 20 नवंबर तक बारिश होती है तो नुकसान की भरपाई हो जाएगी। अगर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक बारिश नहीं होती है तो इसका असर गेहूं की पैदावार और मात्रा पर पड़ेगा। - सुशील शर्मा, उप निदेशक, कृषि विभाग कुल्लू
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मक्की और राजमा की फसल को निकालने के बाद अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही खेत खाली कर दिए थे। 15 अक्तूबर के बाद गेहूं की बिजाई करनी थी। नवंबर का पहला सप्ताह शुरू हो गया है, अभी तक बादल नहीं बरसे हैं। ऐसे में पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।
- सुरेश शर्मा, निवासी बंदल, बंजार
खराहल क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की सुविधा बेहद कम है। ऐसे में खेतों में अधिकतर किसान गेहूं की बिजाई करते हैं। अगर समय पर बारिश नहीं होती है तो इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ेगा। बारिश का न होना देव प्रकोप भी हो सकता है। देवताओं का भी सम्मान होना चाहिए।
- फतेह सिंह राणा, चतानी, खराहल
खरीफ की फसल इस बार सूखे जैसे हालात के चलते प्रभावित हुई है। अगस्त में कम बारिश होने से दालों की पैदावार में 30 फीसदी तक इस बार कमी आई है। अब रबी फसल पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गेहूं की बिजाई के लिए किसानों को बारिश की जरूरत है।
- उमेश ठाकुर, निवासी मनसारी, उझी घाटी
खेतों में नमी न के बराबर है। नमी न होने से किसान रबी फसल की बिजाई को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, किसान बारिश होने की उम्मीद को देखते हुए बीज भी खरीद रहे हैं। पिछले साल भी सर्दियों में कम बारिश हुई थी, अगर ऐसा ही हाल इस वर्ष भी हुआ तो फसलें प्रभावित होंगी।
- प्रीतम चंद, निवासी बनोगी, सैंज