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Kullu News: खेत सूखे, आंखों में पानी, बारिश की बूंदों के लिए आसमान पर नजरें

Mon, 02 Dec 2024 10:18 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Mon, 02 Dec 2024 10:18 PM IST
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Fields are dry, eyes water, eyes on sky for rain drops.
कुल्लू की खराहल घाटी में सेउगी के समीप सेब का एक बगीचा, सूखे जैसे हालात के चलते बागवानी कार्य भ
जिले में तीन महीने से बारिश न होने से रुक गए कृषि और बागवानी के काम
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रबी फसल की बिजाई में एक महीने की देरी, बगीचों में तौलिये नहीं बना पाए बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मौसम विज्ञान केंद्र के बारिश और बर्फबारी के अलर्ट के बावजूद कुल्लू में बारिश नहीं हो रही है। करीब तीन महीने से जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। कृषि के लिए 80 फीसदी भूमि सिंचाई पर निर्भर है।
बारिश न होने से खेतों से नमी गायब हो गई है। रबी फसल गेहूं, जौ, जई और मटर की बिजाई के लिए भी एक महीने की देरी हो गई है। बागवानी पर भी सूखे जैसे हालात का विपरीत असर पड़ रहा है। बगीचों में तौलिये बनाने का काम बागवान नहीं कर पाए हैं।
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पौधों में खाद डालने का रुका है। पौधों के उचित विकास के लिए खाद और गोबर डालना जरूरी होता है। बागवान बगीचों में बागवानी के काम नहीं निपटा पाए हैं। दिसंबर के आखिर तक बागवान तौलिये बना लेते थे, लेकिन इस बार अभी तक बगीचों में काम शुरू नहीं कर पाए हैं। गौर रहे कि जिले में करीब 13000 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई होती है। इसमें महज 20 फीसदी की सिंचाई वाला क्षेत्र है। करीब 30000 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन हो रहा है। बागवानी से जिले की 80 फीसदी आबादी जुड़ी है। जिस तरह से हालात बने हैं, उससे किसानों-बागवानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वे आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं कि आखिर कब बारिश होगी और उनके खेत और बगीचे तर होंगे। उधर, बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने कहा कि सूखे जैसे हालात से बगीचों में नमी कम है। बागवान सेब के पत्ते गिरने से पहले प्रूनिंग न करें।
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--सूखे जैसे हालात में पौधे सूखने का डर है। अधिक धूप वाली जगह पौधे सूख सकते हैं। कई सालों बाद कुल्लू में इस तरह की स्थिति देखी है। अगस्त से नवंबर तक खेत-बगीचे कम बारिश के चलते वीरान जैसे दिखने लगे हैं। - इंद्र सिंह, बंजार
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गेहूं की बिजाई के लिए किसानों ने कृषि प्रसार केंद्रों से बीज खरीदा है। बारिश का इंतजार है। बारिश न होने से गेहूं की बिजाई में करीब एक महीने से अधिक की देरी हुई है। समय पर बिजाई न होने से फसल भी प्रभावित होगी। - वीर चंद ठाकुर, भाटकराल
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ग्रामीण क्षेत्रों में अकसर पीने के पानी की समस्या रहती है। अधिकतर इलाकों में सिंचाई की सुविधा नहीं है। सिंचाई की सुविधा होती तो मुश्किल समय में किसान खेतों में सिंचाई के बाद रबी फसल आसानी से तैयार कर पाते। - तारा चंद, भ्रैंण

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मौसम विज्ञान केंद्र बारिश का अलर्ट जारी कर रहा है, लेकिन चोटियों पर बर्फबारी के बाद निचले क्षेत्रों में बूंद भी नहीं गिर रही है। मौसम की बेरुखी ने किसानों-बागवानों को परेशानी में डाल दिया है। बारिश का इंतजार है। - देवदत्त ठाकुर, गलछेतविधानसभा

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