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Kullu News: बुनकरों के उत्पादों को बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तलाशें संभावना
Sat, 08 Aug 2026 10:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:41 AM IST
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कुल्लू। बुनकर सेवा केंद्र की ओर से देवसदन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त डॉ. जयबंती ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
उन्होंने बुनकर सेवा केंद्र के अधिकारियों से बुनकरों के उत्पादों को बड़े ऑनलाइन विक्रय प्लेटफॉर्म से जोड़ने की संभावना तलाशने का आग्रह किया, ताकि उनके उत्पादों का बाजार बढ़े और उन्हें बेहतर दाम मिल सकें।
उन्होंने कहा कि कुल्लू की पारंपरिक बुनाई ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले के हजारों परिवार हथकरघा व्यवसाय से जुड़े हैं और कुल्लू की ऊनी शॉलों के साथ वूलन साड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।
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हथकरघा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है और इस क्षेत्र के कई बुनकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। बुनकर कड़ी मेहनत से उत्कृष्ट उत्पाद तैयार करते हैं लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
कार्यक्रम में उपनिदेशक विनय कुमार ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से बुनकरों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला कुल्लू में करीब 10 हजार बुनकर कार्यरत हैं।
बुनकर सेवा केंद्र समय-समय पर आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता, वस्त्र नमूने, पेपर डिजाइन और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। केंद्र नाममात्र शुल्क पर तकनीकी सहायता भी देता है। साथ ही बुनाई और रंगाई की आधुनिक तकनीकों से बुनकरों को अवगत कराया जाता है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी आय में सुधार हो सके।
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उन्होंने बुनकर सेवा केंद्र के अधिकारियों से बुनकरों के उत्पादों को बड़े ऑनलाइन विक्रय प्लेटफॉर्म से जोड़ने की संभावना तलाशने का आग्रह किया, ताकि उनके उत्पादों का बाजार बढ़े और उन्हें बेहतर दाम मिल सकें।
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उन्होंने कहा कि कुल्लू की पारंपरिक बुनाई ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले के हजारों परिवार हथकरघा व्यवसाय से जुड़े हैं और कुल्लू की ऊनी शॉलों के साथ वूलन साड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।
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हथकरघा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है और इस क्षेत्र के कई बुनकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। बुनकर कड़ी मेहनत से उत्कृष्ट उत्पाद तैयार करते हैं लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
कार्यक्रम में उपनिदेशक विनय कुमार ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से बुनकरों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला कुल्लू में करीब 10 हजार बुनकर कार्यरत हैं।
बुनकर सेवा केंद्र समय-समय पर आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता, वस्त्र नमूने, पेपर डिजाइन और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। केंद्र नाममात्र शुल्क पर तकनीकी सहायता भी देता है। साथ ही बुनाई और रंगाई की आधुनिक तकनीकों से बुनकरों को अवगत कराया जाता है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी आय में सुधार हो सके।