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जलती मशालों से भगाईं बूरी शक्तियां
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बंजार (कुल्लू)। बंजार घाटी के की और जमद पंचायत के आस्था का केंद्र धमेऊली में मार्गशीर्ष मास की पूर्व संध्या में ईश्वर महादेव का पर्व मनाया गया। इसमें सैकड़ों भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस दौरान हारियानों ने जलती मशालों से बुरी शक्तियों को भगाया।
महादेव का यह पर्व हर वर्ष मनाया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसका निर्वहन हारियानों ने किया। ईश्वर महादेव के गुर भाग सिंह शर्मा, पुजारी रोशन लाल शर्मा, कार्यवाहक कारदार किरण ने बताया कि हर वर्ष जमद व पलाहच पंचायत के हर घरों से जलती हुई मशालों को निकाला जाता है।
पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते हुए धमेऊली में यहां पर देवता ईश्वर महादेव के पुरातन काष्ठकुणी निर्मित मंदिर में लाया जाता है। यहां पर सभी लोग एकत्रित हो जाते हैं। इसके बाद एक भव्य जागरे को जलाया जाता है। उन्होंने बताया यह परंपरा देर रात को निभाई जाती है।
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जागरे को प्रज्वलित करने के बाद होता है नृत्य
इस जागरे को प्रज्वलित करने पर इसके चारों ओर पुरातन नृत्य भी किया जाता है। यह नृत्य देवता की आज्ञा अनुसार आरंभ किया जाता है। इन मशालों व जागरे का तात्पर्य यह है कि क्षेत्र में कोई भी बुरी आत्मा अंदर प्रवेश न करे। इस परंपरा से क्षेत्र में अन्न, जल संपत्ति और अनेक प्रकार की सुख सुविधाएं निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा देवता ईश्वर महादेव की लिए सैकड़ों वर्षों से समर्पित की जाती है। उन्होंनें बताया मार्गशीर्ष मास के साजे के दिन देवता बाहर निकाला जाता है। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति पर देव खेल में आकर की गुर के माध्यम से सभी लोगों को आशीर्वाद दिया जाता है। देवता सभी मनोकामना पूर्ण भी करते हैं।
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महादेव का यह पर्व हर वर्ष मनाया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसका निर्वहन हारियानों ने किया। ईश्वर महादेव के गुर भाग सिंह शर्मा, पुजारी रोशन लाल शर्मा, कार्यवाहक कारदार किरण ने बताया कि हर वर्ष जमद व पलाहच पंचायत के हर घरों से जलती हुई मशालों को निकाला जाता है।
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पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते हुए धमेऊली में यहां पर देवता ईश्वर महादेव के पुरातन काष्ठकुणी निर्मित मंदिर में लाया जाता है। यहां पर सभी लोग एकत्रित हो जाते हैं। इसके बाद एक भव्य जागरे को जलाया जाता है। उन्होंने बताया यह परंपरा देर रात को निभाई जाती है।
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जागरे को प्रज्वलित करने के बाद होता है नृत्य
इस जागरे को प्रज्वलित करने पर इसके चारों ओर पुरातन नृत्य भी किया जाता है। यह नृत्य देवता की आज्ञा अनुसार आरंभ किया जाता है। इन मशालों व जागरे का तात्पर्य यह है कि क्षेत्र में कोई भी बुरी आत्मा अंदर प्रवेश न करे। इस परंपरा से क्षेत्र में अन्न, जल संपत्ति और अनेक प्रकार की सुख सुविधाएं निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा देवता ईश्वर महादेव की लिए सैकड़ों वर्षों से समर्पित की जाती है। उन्होंनें बताया मार्गशीर्ष मास के साजे के दिन देवता बाहर निकाला जाता है। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति पर देव खेल में आकर की गुर के माध्यम से सभी लोगों को आशीर्वाद दिया जाता है। देवता सभी मनोकामना पूर्ण भी करते हैं।