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प्रदेश को रेबीज मुक्त बनाने में सभी करें सहयोग : प्रदीप
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कुल्लू में पशुपालन विभाग के सेमिनार में भाग लेते हुए।-
कुल्लू। देश और प्रदेश को साल 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब पशुपालन विभाग के साथ नगर निकाय, पंचायतें, सामाजिक संगठन और हर एक व्यक्ति मिलकर काम करें। विभाग लावारिस के साथ पालतू कुत्तों की वैक्सीनेशन कर रहा है। जन भागीदारी से इस वैक्सीनेशन कार्य में तेजी आएगी और रेबीज के मामले भी कम होंगे। यह बात पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा ने कही। जिला परिषद भवन कुल्लू में शनिवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्व रेबीज दिवस पर यह कार्यशाला रेबीज की सीमाओं को तोड़ना विषय पर आयोजित की गई।
कार्यशाला में पशुपालन विभाग के निदेशक प्रदीप शर्मा, उपनिदेशक कुल्लू डॉ. राजेंद्र पॉल विशेष तौर पर उपस्थित रहे। पशु चिकित्सालय पतलीकूहल की वेटरनेरी अधिकारी डॉ. प्रियंका लखनपाल मुख्य वक्ता रहीं। डॉ. प्रियंका लखनपाल ने कहा कि 18 सालों से रेबीज को मात देने की कोशिश जारी है। रेबीज को रोकने के लिए हर कुत्ते की वैक्सीनेशन करना जरूरी है। इसके लिए पशुपालन विभाग के साथ सामाजिक संस्थाओं को भी साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि रेबीज सिर्फ कुत्ते के काटने से ही नहीं फैलता।
इस जानलेवा बीमारी के फैलने के कई कारण हैं। वर्तमान समय में जंगली जानवर भी रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं। रेबीज के शिकार जानवर की चपेट में पालतू पशु के आने से भी रेबीज हो सकता है। कहा कि लोग जितना संभव हो सके, दूध तक को उबालकर ही पीएं क्योंकि रेबीज संक्रमित गाय, भैंस आदि का कच्चा दूध पीने से भी रेबीज हो सकता है। संवाद
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कार्यशाला में पशुपालन विभाग के निदेशक प्रदीप शर्मा, उपनिदेशक कुल्लू डॉ. राजेंद्र पॉल विशेष तौर पर उपस्थित रहे। पशु चिकित्सालय पतलीकूहल की वेटरनेरी अधिकारी डॉ. प्रियंका लखनपाल मुख्य वक्ता रहीं। डॉ. प्रियंका लखनपाल ने कहा कि 18 सालों से रेबीज को मात देने की कोशिश जारी है। रेबीज को रोकने के लिए हर कुत्ते की वैक्सीनेशन करना जरूरी है। इसके लिए पशुपालन विभाग के साथ सामाजिक संस्थाओं को भी साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि रेबीज सिर्फ कुत्ते के काटने से ही नहीं फैलता।
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इस जानलेवा बीमारी के फैलने के कई कारण हैं। वर्तमान समय में जंगली जानवर भी रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं। रेबीज के शिकार जानवर की चपेट में पालतू पशु के आने से भी रेबीज हो सकता है। कहा कि लोग जितना संभव हो सके, दूध तक को उबालकर ही पीएं क्योंकि रेबीज संक्रमित गाय, भैंस आदि का कच्चा दूध पीने से भी रेबीज हो सकता है। संवाद
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