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Kullu News: मस्तिष्काघात आने पर हर मिनट कीमती, चार घंटे में इलाज से बच सकती है जान

Thu, 30 Oct 2025 10:24 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 30 Oct 2025 10:24 PM IST
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Every minute is precious in the event of a stroke; treatment within four hours can save lives.
चेहरा लटकना, अंगों में कमजोरी या अस्पष्ट भाषा जैसे लक्षण दिखने पर सीटी स्कैन करवाना जरूरी
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देश-दुनिया में लगातार बढ़ रही मस्तिष्काघात के मरीजों की संख्या : डॉ. कल्याण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। देश-दुनिया में मस्तिष्काघात (स्ट्रोक) के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका मुख्य कारण उच्च रक्तचाप और मधुमेह है। यह दो प्रमुख जोखिम कारक हैं जिनसे मस्तिष्काघात की संभावना निरंतर बनी रहती है।
मस्तिष्काघात केवल एक लकवा नहीं है, यह मस्तिष्क के अंदर एक चिकित्सीय आपात स्थिति है। चेहरे का लटकना, अंगों में कमजोरी या अस्पष्ट भाषा जैसे लक्षण दिखने पर मरीज को सीटी स्कैन सुविधा वाले अस्पताल में लाना अनिवार्य होता है। साढ़े चार घंटे के भीतर जांच और उपचार मिलने से मरीज को मस्तिष्काघात की चपेट में आने से बचाया जा सकता है।
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क्षेत्रीय अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. कल्याण सिंह ने कहा कि मस्तिष्काघात के मामलों में हर मिनट मायने रखता है। समय पर की गई उपचार संबंधी कार्रवाई से मरीज के स्वस्थ होने और जीवन भर की विकलांगता के बीच का अंतर बड़ा हो सकता है।
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मस्तिष्काघात के कारण
मस्तिष्काघात होने के कारणों की सूची में रक्तचाप सबसे ऊपर है। इसके अलावा मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा, तनाव और निष्क्रियता भी कारण हो सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि 80 फीसदी तक मस्तिष्काघात को समय पर उपचार कर रोका जा सकता है।

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मस्तिष्काघात से ऐसे बचें
जीवनशैली में साधारण बदलाव कर मस्तिष्काघात के खतरे को कम किया जा सकता है। रोजाना टहलना, नमक और तेल का कम सेवन, ज्यादा फल और सब्जियां खाना, तंबाकू और शराब से परहेज, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और बेहतर नींद जोखिम को काफी हद तक कम करता है।
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