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Kullu News: 26 साल बाद शाही स्नान करेंगे देवता गिरमल
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माता दशमी वारदा और पनाणू देवता के चिह्नों का भी होगा शाही स्नान
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। क्षेत्र के बनोगी गांव के गिरमल देवता 26 वर्ष बाद शाही स्नान के लिए धार्मिक नगरी मणिकर्ण जाएंगे। देवता के साथ माता दशमी वारदा और देवता पनाणू के चिह्न (धड़छ-घंटी) भी जाएंगे। इसकी देवलुओं और कारकूनों सहित हारियानों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 25 अप्रैल को देवता अपने देवालय बनोगी से पूजा-अर्चना के बाद जंगल के रास्ते मणिकर्ण रवाना होंगेे।
देवता 25 अप्रैल की शाम आनी थाच में रात्रि ठहराव करेंगे। 26 अप्रैल को देवता की शाही यात्रा फिर शुरू होगी और शाम को जरी के समीप डुंखरा में रात्रि ठहराव होगा। 27 अप्रैल को पूजा-पाठ के बाद फिर यात्रा शुरू होगी और रात्रि ठहराव के लिए देवता मणिकर्ण पहुंचेंगे। 28 अप्रैल की सुबह शाही स्नान करेंगे। देवता गिरमल के कारदार ठाकर चंद कोटिया और पनाणू देवता के पुजारी सुरेश दरोगा ने कहा कि 26 साल के बाद देवता शाही स्नान करने जा रहे हैं।
देवता के साथ देवलू और हारियान 28 अप्रैल को मणिकर्ण में शाही स्नान करेंगे। उन्होंने कहा कहा कि उसी दिन देवता शाम को वापस रसोल गांव पहुंचेंगे। 29 अप्रैल को मलाणा, 30 अप्रैल को दोहरा और एक मई को नरईडी तथा दो मई को देवालय में पहुंचेंगे। इस दिन देवलुओं और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में देव भोज का आयोजन होगा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। क्षेत्र के बनोगी गांव के गिरमल देवता 26 वर्ष बाद शाही स्नान के लिए धार्मिक नगरी मणिकर्ण जाएंगे। देवता के साथ माता दशमी वारदा और देवता पनाणू के चिह्न (धड़छ-घंटी) भी जाएंगे। इसकी देवलुओं और कारकूनों सहित हारियानों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 25 अप्रैल को देवता अपने देवालय बनोगी से पूजा-अर्चना के बाद जंगल के रास्ते मणिकर्ण रवाना होंगेे।
देवता 25 अप्रैल की शाम आनी थाच में रात्रि ठहराव करेंगे। 26 अप्रैल को देवता की शाही यात्रा फिर शुरू होगी और शाम को जरी के समीप डुंखरा में रात्रि ठहराव होगा। 27 अप्रैल को पूजा-पाठ के बाद फिर यात्रा शुरू होगी और रात्रि ठहराव के लिए देवता मणिकर्ण पहुंचेंगे। 28 अप्रैल की सुबह शाही स्नान करेंगे। देवता गिरमल के कारदार ठाकर चंद कोटिया और पनाणू देवता के पुजारी सुरेश दरोगा ने कहा कि 26 साल के बाद देवता शाही स्नान करने जा रहे हैं।
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देवता के साथ देवलू और हारियान 28 अप्रैल को मणिकर्ण में शाही स्नान करेंगे। उन्होंने कहा कहा कि उसी दिन देवता शाम को वापस रसोल गांव पहुंचेंगे। 29 अप्रैल को मलाणा, 30 अप्रैल को दोहरा और एक मई को नरईडी तथा दो मई को देवालय में पहुंचेंगे। इस दिन देवलुओं और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में देव भोज का आयोजन होगा। संवाद
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