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Kullu News: मकराहड़ में आज शाही स्नान करेंगे देव मार्कंडेय ऋषि
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कुल्लू। बैसाख संक्रांति के अवसर पर जिले के देवालयों में उत्सवों की धूम रहेगी। देवी-देवता अपने देवालयों से बाहर निकलेंगे। इस दौरान देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना होगी और देव परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा। ब्यास और गौमती नदी के संगम स्थल मकराहड़ में शनिवार को हुरला के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि शाही स्नान करेंगे। देवता मार्कंडेय ऋषि सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भी आस्था की डुबकी लगाएंगे।
बैसाखी पर्व पर देवता के रथ को विशेष रूप से सजाया जाएगा। ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की ध्वनियों पर देवता मकराहड़ के लिए रवाना होंगे। शाही स्नान की परंपरा का निर्वहन करने के बाद देवता अपनी मां (धरती माता) से मिलेंगे। देवता की ओर से दूध पीने की रस्म निभाई जाएगी। मान्यता है कि जमीन से दूध की धारा फूटती है, इस ध्वनि को कारकून सुन सकते हैं। देवता के कारदार जीवन शर्मा ने कहा कि वैसाख संक्रांति के दिन मार्कंडेय ऋषि लाव लश्कर के साथ उस स्थान पर अपनी मां से मिलने जाते हैं, जहां सैकड़ों साल पहले बैसाखी के दिन देवता का मोहरा मिला था।
वहीं जिया गांव में देवता बिजली महादेव भी पहुंचेंगे। यहां पर तीन दिनों तक मेले का आयोजन होगा। सोमवार तक यहां पर मेले की धूम रहेगी। इसके साथ ही गाहर में विरशू मेला होगा। थाच में जेठा विरशू, लगघाटी के बड़ाग्रां में कोना विरशू होगा। गड़सा घाटी के आशणी में देवता भृगु ऋषि के सम्मान में भी वैसाखी मेला होगा। ग्रामीणों में मेलों को लेकर खुशी का माहौल है। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष एवं माता दशमी वारदा के कारदार दोत राम ठाकुर ने कहा कि गाहर के बाद काइस में विरशू मेला मनाया जाएगा। संवाद
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बैसाखी पर्व पर देवता के रथ को विशेष रूप से सजाया जाएगा। ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की ध्वनियों पर देवता मकराहड़ के लिए रवाना होंगे। शाही स्नान की परंपरा का निर्वहन करने के बाद देवता अपनी मां (धरती माता) से मिलेंगे। देवता की ओर से दूध पीने की रस्म निभाई जाएगी। मान्यता है कि जमीन से दूध की धारा फूटती है, इस ध्वनि को कारकून सुन सकते हैं। देवता के कारदार जीवन शर्मा ने कहा कि वैसाख संक्रांति के दिन मार्कंडेय ऋषि लाव लश्कर के साथ उस स्थान पर अपनी मां से मिलने जाते हैं, जहां सैकड़ों साल पहले बैसाखी के दिन देवता का मोहरा मिला था।
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वहीं जिया गांव में देवता बिजली महादेव भी पहुंचेंगे। यहां पर तीन दिनों तक मेले का आयोजन होगा। सोमवार तक यहां पर मेले की धूम रहेगी। इसके साथ ही गाहर में विरशू मेला होगा। थाच में जेठा विरशू, लगघाटी के बड़ाग्रां में कोना विरशू होगा। गड़सा घाटी के आशणी में देवता भृगु ऋषि के सम्मान में भी वैसाखी मेला होगा। ग्रामीणों में मेलों को लेकर खुशी का माहौल है। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष एवं माता दशमी वारदा के कारदार दोत राम ठाकुर ने कहा कि गाहर के बाद काइस में विरशू मेला मनाया जाएगा। संवाद
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