खुडीजल समेत बारह देवता आठ को करेंगे कुल्लू कूच
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देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के लिए जिला के सैकड़ों देवी देवताओं के रथ सजकर तैयार हो गए हो गए है। ढोल-नगाड़े, नरसिंघे, करनाला व शहनाई को भी दशहरा उत्सव के लिए विशेष रूप से सजाया गया है। करीब दो सप्ताह तक अपने अधिष्ठाता देव की चाकरी के लिए दशहरा उत्सव के लिए देवी देवता के कारकून, हरियान तथा देवलुओं ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दशहरा उत्सव के लिए अभी पांच दिन का समय ही शेष रह गया है। ऐसे में जिला प्रशासन और देवी समाज में हलचल तेज हो गई है। दशहरा में अपनी भागदारी सुनिश्चित करने के लिए देवरथ तैयार हो गए हैं और आठ अक्तूबर से देवी देवताओं का दशहरा के लिए रवानगी शुरू हो जाएगी। आठ अक्तूबर को बाह्य सराज के देवी देवता अपने देवालय से कुल्लू के लिए कूच कर देंगे।
जिला के सबसे अमीर देवी देवताओं में शुमार अधिष्ठाता देव खुडीजल, ब्यास ऋषि, कोट पझारी, टकरासी नाग तथा चोतरू नाग के साथ सबसे अधिक 200 किलोमीटर की लंबा सफर तय करने वाले जिला के बाह्य सराज निरमंड के चंभू कशोली, चंभू रंदल तथा सप्तऋषि आदि देवता आठ अक्तूबर को दशहरा के लिए कूच करेंगे। इसके अलावा बंजार और सैंज घाटी के दुर्गम इलाकों के देवी-देवता भी इसी दिन अपने देवालय से बाहर निकलकर पहले पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे।
देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह, पुजारी पूर्ण शर्मा ने कहा कि देवता खुडीजल आठ अक्तूबर को अपने देवालय देहुरी से दशहरा को लाव लश्कर के साथ निकलेंगे। देवता का पहला पड़ाव फनौटी गांव में होगा। दूसरा बंजार, तीसरा टकोली तथा 11 अक्तूबर की सुबह नौ बजे ढालपुर में विराजमान हो जाएंगे। जिला देवी देवता कारदार संघ के प्रधान दोत राम ठाकुर तथा सह सचिव भागे राम राणा का कहना है कि दूरदराज के देवी देवता दशहरा से तीन-चार दिन पहले ही रवाना हो जाते हैं। कई देवता 200 किलोमीटर तक का पैदल सफर कर कुल्लू पहुंचते हैं। उधर, उपायुक्त कुल्लू एवं दशहरा समिति के उपाध्यक्ष युनूस ने कहा कि दशहरा में आने वाले देवी देवताओं की सुरक्षा, रहन-सहन व अन्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।