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कुल्लू में डार्क बेरॉन गाला सेब ने मचाई धूम
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बंदरोल सब्जी मंडी में पहुंचा गाला सेब। संवाद।
- फोटो : Kullu
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अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। डार्क बेरॉन गाला किस्म का सेब हर साल मंडियों में धूम मचा रहा है। इस वर्ष भी गाला की मंडियों में धमाकेदार एंट्री हुई है। फल का रंग गुलाबी, आकार मध्यम तथा खाने में खट्टा-मीठा होने के कारण व्यापारियों और उपभोक्ता इसे काफी पसंद कर रहे हैं। इस बार गाला सेब मंडी में 151 रुपये प्रति किलो के हिसाब हाथों हाथ बिका है।
विगत वर्ष भी गाला के रेट बागवानों को अच्छे मिले थे। पिछले वर्ष स्थानीय मंडी में गाला 130 रुपये प्रति किलो तक बिका था। बंदरोल सब्जी मंडी में मंगलवार को गाला सेब की 23 क्रेट पहुंची थी। अच्छे रेट मिलने से बागवान गदगद हैं। हालांकि अभी कम मात्रा में ही गाला सेब मंडियों में पहुंच रहा है। अमूमन गाला जुलाई के अंतिम पखवाड़े में तैयार होता है। उम्दा रंग की इस किस्म की ओर बागवानों का रुझान कुछ सालों बढ़ा है।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञ भी इस किस्म के सेब को अपने उद्यान में उगा रहे हैं। बागवान टिकम ठाकुुर, प्रताप पठानिया, चुनी लाल, चंदेराम ठाकुर व कैलाश ठाकुर ने कहा कि गाला किस्म को बाजार मे उपभोक्ता काफी पसंद कर रहे हैं। आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि मंडियों में 23 क्रेट गाला की पहुंच, जिसकी बोली 151 रुपये तक लगी है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के प्रधान महेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि सेब की गाला किस्म मंडियों में पहुंचना शुरू हो गई है। बागवान सेब की गुणवत्ता, रंग और आकार पर विशेष ध्यान दें। देखादेखी में मंडियों में कच्चा माल न भेजें। इसकी वजह से मार्केट में दामों की स्थिरता नहीं रहेगी और बागवानों को नुकसान झेलना पड़ता है। संवाद
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गाला सेब की हैं कई किस्में
बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने कहा कि गाला सेब कई किस्मों में होता हैं। इनमें गेल गाला, रेडलम गाला, डार्क बेरॉन गाला, स्कार लेट गाला, शैलट गाला व बुकी गाला प्रमुख हैं। इन किस्म का फल स्वादिष्ट, मध्यम आकार, गुलाबी रंग, खट्टा-मीठा और रसदार होता है। फल काफी आकर्षक भी है। इस कारण बाजार में बागवानों को इसके उम्दा दाम मिल रहे हैं।
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कुल्लू/खराहल। डार्क बेरॉन गाला किस्म का सेब हर साल मंडियों में धूम मचा रहा है। इस वर्ष भी गाला की मंडियों में धमाकेदार एंट्री हुई है। फल का रंग गुलाबी, आकार मध्यम तथा खाने में खट्टा-मीठा होने के कारण व्यापारियों और उपभोक्ता इसे काफी पसंद कर रहे हैं। इस बार गाला सेब मंडी में 151 रुपये प्रति किलो के हिसाब हाथों हाथ बिका है।
विगत वर्ष भी गाला के रेट बागवानों को अच्छे मिले थे। पिछले वर्ष स्थानीय मंडी में गाला 130 रुपये प्रति किलो तक बिका था। बंदरोल सब्जी मंडी में मंगलवार को गाला सेब की 23 क्रेट पहुंची थी। अच्छे रेट मिलने से बागवान गदगद हैं। हालांकि अभी कम मात्रा में ही गाला सेब मंडियों में पहुंच रहा है। अमूमन गाला जुलाई के अंतिम पखवाड़े में तैयार होता है। उम्दा रंग की इस किस्म की ओर बागवानों का रुझान कुछ सालों बढ़ा है।
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बागवानी विभाग के विशेषज्ञ भी इस किस्म के सेब को अपने उद्यान में उगा रहे हैं। बागवान टिकम ठाकुुर, प्रताप पठानिया, चुनी लाल, चंदेराम ठाकुर व कैलाश ठाकुर ने कहा कि गाला किस्म को बाजार मे उपभोक्ता काफी पसंद कर रहे हैं। आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मोहन लाल ठाकुर ने कहा कि मंडियों में 23 क्रेट गाला की पहुंच, जिसकी बोली 151 रुपये तक लगी है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के प्रधान महेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि सेब की गाला किस्म मंडियों में पहुंचना शुरू हो गई है। बागवान सेब की गुणवत्ता, रंग और आकार पर विशेष ध्यान दें। देखादेखी में मंडियों में कच्चा माल न भेजें। इसकी वजह से मार्केट में दामों की स्थिरता नहीं रहेगी और बागवानों को नुकसान झेलना पड़ता है। संवाद
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गाला सेब की हैं कई किस्में
बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने कहा कि गाला सेब कई किस्मों में होता हैं। इनमें गेल गाला, रेडलम गाला, डार्क बेरॉन गाला, स्कार लेट गाला, शैलट गाला व बुकी गाला प्रमुख हैं। इन किस्म का फल स्वादिष्ट, मध्यम आकार, गुलाबी रंग, खट्टा-मीठा और रसदार होता है। फल काफी आकर्षक भी है। इस कारण बाजार में बागवानों को इसके उम्दा दाम मिल रहे हैं।