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Kullu News: लिंडूर गांव में खेत-खलिहान पर संकट, धंस गई 100 बीघा जमीन
Mon, 12 May 2025 10:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 12 May 2025 10:09 PM IST
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पांच साल से धीरे-धीरे धंस रहा गांव, लोगों में दहशत, बोले- पिछले साल घरों में आ गई थीं दरारें
सरकार और प्रशासन नहीं ढूंढ पाए समाधान, उपजाऊ भूमि में हाल ही लगाई है आलू की फसल
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के लिंडूर गांव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यह गांव पिछले पांच साल से धी-धीरे धंस रहा है। अभी तक गांव की 100 बीघा जमीन धंस चुकी है।
500 बीघा भूमि पर संकट मंडरा रहा है। इससे लाेगों में डर का माहौल है। इस साल फिर गांव के साथ लगते खेत-खलियान धंसने गले हैं। इनमें हाल ही में लोगों ने आलू की फसल लगाई है।
उधर, सरकार और प्रशासन गांव को धंसने से बचाने के लिए कोई समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। ऐसे में गांव के साथ 500 बीघा उपजाऊ भूमि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जमीन धंसने से लोगों की फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। इस बार भी गांव के साथ लगती जमीन बड़े स्तर पर धंसना शुरू हो गई है।
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प्रशासन दो साल से लगातार सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जिस तरह से जमीन धंस रही है, उसके आगे सरकार और प्रशासन भी बेबस होते दिखाई दे रहे हैं। बीते वर्ष इस गांव के कई घरों में दरारें आ गई थीं। इस बार फिर से यहां गांव के साथ लगते खेत-खलियान धंसने शुरू हो गए हैं। लोगों की मानें तो अब तक गांव की सौ बीघा भूमि धंस चुकी है, जबकि पांच सौ बीघा भूमि पर खतरा मंडरा रहा है।
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अस्तित्व की जंग लड़ रहा हीरो ऑफ कंचनजंगा का गांव
यह हीरो ऑफ कंचनजंगा, स्नो टाइगर के नाम से प्रसिद्ध रहे हिमालयन आउटडोर एडवेंचर अकादमी के संस्थापक दिवंगत कर्नल प्रेम चंद का गांव है। इन्होंने गांव और जिले को देशभर में नाम दिलाया है। आज उनका यह गांव अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। लिहाजा, उनका यह गांव पांच साल से धीरे-धीरे नाले में समा रहा है।
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ग्रामीण बोले अभी तक समाधान नहीं निकला
लिंडूर के ग्रामीणों में रमेश यंगथांगबा, जगदीश फुडपा, प्रेम लाल राशपा, छेरिंग दोरजे राशपा और अश्वनी राशपा ने कहा कि गांव पांच साल से धंसता जा रहा है। सरकार और प्रशासन गांव को बचाने के लिए रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी रास्ता नहीं निकल पाया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन इसे बचाने के लिए गंभीर नजर नहीं आ रही है।
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लिंडूर गांव में जमीन धंसने की सूचना मिली है। ग्रामीणों ने बताया है कि इस जमीन पर कुछ दिन पहले ही आलू की बिजाई की गई थी। नुकसान का आकलन करने के लिए कल विधायक के साथ प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम मौके का दौरा करने जा रही है।
- रमेश राणा, तहसीलदार केलांग
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सरकार और प्रशासन नहीं ढूंढ पाए समाधान, उपजाऊ भूमि में हाल ही लगाई है आलू की फसल
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के लिंडूर गांव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यह गांव पिछले पांच साल से धी-धीरे धंस रहा है। अभी तक गांव की 100 बीघा जमीन धंस चुकी है।
500 बीघा भूमि पर संकट मंडरा रहा है। इससे लाेगों में डर का माहौल है। इस साल फिर गांव के साथ लगते खेत-खलियान धंसने गले हैं। इनमें हाल ही में लोगों ने आलू की फसल लगाई है।
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उधर, सरकार और प्रशासन गांव को धंसने से बचाने के लिए कोई समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। ऐसे में गांव के साथ 500 बीघा उपजाऊ भूमि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जमीन धंसने से लोगों की फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। इस बार भी गांव के साथ लगती जमीन बड़े स्तर पर धंसना शुरू हो गई है।
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प्रशासन दो साल से लगातार सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जिस तरह से जमीन धंस रही है, उसके आगे सरकार और प्रशासन भी बेबस होते दिखाई दे रहे हैं। बीते वर्ष इस गांव के कई घरों में दरारें आ गई थीं। इस बार फिर से यहां गांव के साथ लगते खेत-खलियान धंसने शुरू हो गए हैं। लोगों की मानें तो अब तक गांव की सौ बीघा भूमि धंस चुकी है, जबकि पांच सौ बीघा भूमि पर खतरा मंडरा रहा है।
अस्तित्व की जंग लड़ रहा हीरो ऑफ कंचनजंगा का गांव
यह हीरो ऑफ कंचनजंगा, स्नो टाइगर के नाम से प्रसिद्ध रहे हिमालयन आउटडोर एडवेंचर अकादमी के संस्थापक दिवंगत कर्नल प्रेम चंद का गांव है। इन्होंने गांव और जिले को देशभर में नाम दिलाया है। आज उनका यह गांव अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। लिहाजा, उनका यह गांव पांच साल से धीरे-धीरे नाले में समा रहा है।
ग्रामीण बोले अभी तक समाधान नहीं निकला
लिंडूर के ग्रामीणों में रमेश यंगथांगबा, जगदीश फुडपा, प्रेम लाल राशपा, छेरिंग दोरजे राशपा और अश्वनी राशपा ने कहा कि गांव पांच साल से धंसता जा रहा है। सरकार और प्रशासन गांव को बचाने के लिए रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी रास्ता नहीं निकल पाया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन इसे बचाने के लिए गंभीर नजर नहीं आ रही है।
लिंडूर गांव में जमीन धंसने की सूचना मिली है। ग्रामीणों ने बताया है कि इस जमीन पर कुछ दिन पहले ही आलू की बिजाई की गई थी। नुकसान का आकलन करने के लिए कल विधायक के साथ प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम मौके का दौरा करने जा रही है।
- रमेश राणा, तहसीलदार केलांग