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कैडेट्स को प्रदेश में विमान उड़ाने का दिया जाए प्रशिक्षण
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कुल्लू महाविद्यालय में मागों को लेकर एनसीसी के कैडेट प्रधानाचार्य को ज्ञापन सौंपते हुए।-संवाद
- फोटो : Kullu
कुल्लू। प्रदेश के एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स को फ्लाइंग प्रशिक्षण के लिए अमृतसर जाना पड़ता है। हालांकि एचपी एक एनसीसी एयर स्क्वाड्रन कुल्लू के पास अपने दो माइक्रोलाइट विमान हैं, लेकिन यह विमान भी हैंगर और रन-वे (टैक्सी-वे) की समस्या के कारण कुल्लू नहीं पहुंच पाए हैं।
रन-वे न होने के कारण प्रदेश के 500 से अधिक कैडेट्स को हर साल इस समस्या से परेशान होना पड़ता है। ऐसे में एनसीसी एयर विंग कुल्लू के कैडेट्स ने महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रोशन लाल के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन कैडेट्स ने कुल्लू हवाई अड्डा में बनने वाले रन-वे के कार्य को शीघ्र शुरू करने की मांग की। सीनियर कैडेट मनीष, अदिति और शिवानी ने कहा कि कुल्लू में साल 1972 से एनसीसी एयरविंग है।
इसके बावजूद सालों बाद भी हैंगर और रन-वे की समस्या हल नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स को भुगतना पड़ रहा है।
विमान एनसीसी एयरविंग पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का हिस्सा है। कैडेट्स को विमान उड़ाने का प्रशिक्षण के लिए प्रदेश को छोड़कर दूसरे राज्य में जाना पड़ता है। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इतनी लंबी दूरी का विकल्प सही नहीं है। इस वजह से कई कैडेट विमान उड़ान के अनुभव से वंचित हो जाते हैं, जबकि हर एक कैडेट के लिए हर साल दो सप्ताह का उड़ान प्रशिक्षण अनिवार्य रहता है।
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इस दौरान जूनियर कैडेट यशपाल, रीना, जितेंद्र आदि उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. रोशन लाल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से सरकार और निदेशक से उठाने का आश्वासन दिया।
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रन-वे न होने के कारण प्रदेश के 500 से अधिक कैडेट्स को हर साल इस समस्या से परेशान होना पड़ता है। ऐसे में एनसीसी एयर विंग कुल्लू के कैडेट्स ने महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रोशन लाल के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन कैडेट्स ने कुल्लू हवाई अड्डा में बनने वाले रन-वे के कार्य को शीघ्र शुरू करने की मांग की। सीनियर कैडेट मनीष, अदिति और शिवानी ने कहा कि कुल्लू में साल 1972 से एनसीसी एयरविंग है।
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इसके बावजूद सालों बाद भी हैंगर और रन-वे की समस्या हल नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स को भुगतना पड़ रहा है।
विमान एनसीसी एयरविंग पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का हिस्सा है। कैडेट्स को विमान उड़ाने का प्रशिक्षण के लिए प्रदेश को छोड़कर दूसरे राज्य में जाना पड़ता है। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इतनी लंबी दूरी का विकल्प सही नहीं है। इस वजह से कई कैडेट विमान उड़ान के अनुभव से वंचित हो जाते हैं, जबकि हर एक कैडेट के लिए हर साल दो सप्ताह का उड़ान प्रशिक्षण अनिवार्य रहता है।
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इस दौरान जूनियर कैडेट यशपाल, रीना, जितेंद्र आदि उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. रोशन लाल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से सरकार और निदेशक से उठाने का आश्वासन दिया।