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Kullu News: डेढ़ साल से लाइसेंस के फेर में फंसी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट
Sun, 14 Jan 2024 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 14 Jan 2024 11:25 PM IST
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कुल्लू में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट डेढ़ साल से शोपीस बनकर रह गई है।-संवाद
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट करीब डेढ़ साल से धूल फांक रही है। सितंबर 2022 में स्थापित यूनिट को लाइसेंस नहीं मिल पाया है। अन्य तमाम औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं। बस लाइसेंस न मिलने से यूनिट काम नहीं कर रही है।
यूनिट के शुरू होने से रक्त बेकार नहीं होगा और एक यूनिट चार जिंदगियां बचा सकेगी। अस्पताल के ब्लड बैंक में अब तक एक यूनिट रक्त का लाभ एक ही मरीज को मिल पाता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर की मदद से एक यूनिट रक्त को चार हिस्सों में अलग-अलग किया जा सकता है। यानी एक यूनिट रक्त का लाभ चार जरूरतमंदों को दिया जा सकेगा।
ब्लड बैंक में यूनिट तो स्थापित कर दी गई, लेकिन लाइसेंस न मिलने के कारण मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश चंद ने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट चलाने के लिए लाइसेंस नहीं मिल पाया है। अस्पताल की यूनिट में आधुनिक मशीनों को स्थापित कर दिया गया है।
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जल्द लाइसेंस दिलाने का रहेगा प्रयास
कुल्लू अस्पताल में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के संचालन को लेकर लाइसेंस नहीं मिल पाया है। यह मामला ध्यान में नहीं था। यूनिट के संचालन के लिए प्रक्रिया पूरी कर जल्द लाइसेंस दिलाने का प्रयास रहेगा।
-सुंदर सिंह ठाकुर, सीपीएस
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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
रक्त में चार कंपोनेंट पाए जाते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की परत को अलग-अलग किया जाता है। सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को चार अलग-अलग भागों में बांटा जाता है। इसके बाद जरूरतमंद मरीजों को सिर्फ वही तत्व चढ़ाया जाता है जिसकी जरूरत होती है। इस प्रक्रिया से अस्पताल में रक्त की कमी भी नहीं आती। मरीजों के तीमारदारों को रक्त के लिए भटकना भी नहीं पड़ता।
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यूनिट के शुरू होने से रक्त बेकार नहीं होगा और एक यूनिट चार जिंदगियां बचा सकेगी। अस्पताल के ब्लड बैंक में अब तक एक यूनिट रक्त का लाभ एक ही मरीज को मिल पाता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर की मदद से एक यूनिट रक्त को चार हिस्सों में अलग-अलग किया जा सकता है। यानी एक यूनिट रक्त का लाभ चार जरूरतमंदों को दिया जा सकेगा।
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ब्लड बैंक में यूनिट तो स्थापित कर दी गई, लेकिन लाइसेंस न मिलने के कारण मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश चंद ने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट चलाने के लिए लाइसेंस नहीं मिल पाया है। अस्पताल की यूनिट में आधुनिक मशीनों को स्थापित कर दिया गया है।
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जल्द लाइसेंस दिलाने का रहेगा प्रयास
कुल्लू अस्पताल में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के संचालन को लेकर लाइसेंस नहीं मिल पाया है। यह मामला ध्यान में नहीं था। यूनिट के संचालन के लिए प्रक्रिया पूरी कर जल्द लाइसेंस दिलाने का प्रयास रहेगा।
-सुंदर सिंह ठाकुर, सीपीएस
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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
रक्त में चार कंपोनेंट पाए जाते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की परत को अलग-अलग किया जाता है। सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को चार अलग-अलग भागों में बांटा जाता है। इसके बाद जरूरतमंद मरीजों को सिर्फ वही तत्व चढ़ाया जाता है जिसकी जरूरत होती है। इस प्रक्रिया से अस्पताल में रक्त की कमी भी नहीं आती। मरीजों के तीमारदारों को रक्त के लिए भटकना भी नहीं पड़ता।